Showing posts with label स्त्री. Show all posts
Showing posts with label स्त्री. Show all posts

Saturday, March 9, 2013

सुबह जब आँख खुली



सुबह जब आँख खुली तो 
सुबह बदली बदली सी लगी
ना सूरज की रश्मियाँ दिखाई दी 
ना कोयल की कूंक 
चिड़ियों की चचहाट सुनायी दी
ना पत्तों पर ओस की बूँदें 
ना कलियों में 
पुष्प बन खिलने की 
आतुरता थी
सोचता समझता कारण 
जानने का प्रयत्न करता 
उसे पहले ही पता चल गया
आज भी अखबार के 
पहले पन्ने पर 
एक नाबालिग से बलात्कार 
फिर ह्त्या की खबर छपी थी
18-18-08-01-2013
नारी,उत्पीडन,स्त्री ,अत्याचार,हत्या,बलात्कार 
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Sunday, December 30, 2012

जब तक बदलेंगे नहीं पुरुष



 कुचली जायेंगी 
नौची जायेंगी 
जलाई जाती रहेंगी
नारियां 
मोमबत्तियां जलाई 
जायंगी
मोमबत्तियां बुझ 
भी जायेंगी
तस्वीर पर फूल
चढ़ाए जायेंगे 
फूल मुरझा भी जायेंगे
सैकड़ों सालों से
नहीं बदली है स्थिति 
सैकड़ों सालो तक
नहीं बदलेगी स्थिति 
जब तक बदलेंगे नहीं
पुरुष मानसिकता अपनी 
मानेंगे नहीं नारी को देवी
देखेंगे नहीं नारी में 
अपनी माँ,बहन,बेटी
975-94-30-12-2012
नारी,स्त्री,माँ,बहन बेटी ,औरत,