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Friday, January 20, 2012

नहीं चाहता तूँ बदनाम हो जाए


   अपने अक्स को
बहुत सम्हाल कर
रखता हूँ
नहीं चाहता
जिस तरह मैं टूट गया
उस तरह मेरा अक्स
टूट जाए 
दिल बाहर निकल कर
बिखर जाए
उस पर लिखे तेरी
बेवफायी के किस्से
दुनिया को 
पता चल जाए
निरंतर
दिल से चाहा तुझ को
नहीं चाहता
   तूँ बदनाम हो जाए    
19-01-2012
67-67-01-12

Friday, August 12, 2011

निरंतर उम्मीद में जीता हूँ मैं

सूरत अपनी

देखते थे

जिस शीशे में वो

उस शीशे को रोज़

गौर से देखता हूँ मैं

अक्स गर छुपा हो

उनका कहीं उसमें

ढूंढता हूँ मैं

उसे देख कर ही

सुकून मिल जाएगा

ख्याल जहन में

रखता हूँ मैं

निरंतर उम्मीद में

जीता हूँ मैं

12-08-2011

1348-70-08-11

Thursday, July 28, 2011

इसे देखूं या उसे देखूं ?

दो चाँद

दो चाँद

जहाँ में खिले

इक ज़मीं पर

इक आसमाँ में

दोनों अक्स इक दूजे के

दिल सोच में फँसा

किसे देखूं ?,

किसे ना देखूं ?

दोनों टुकड़े दिल के मेरे

ना दिल तोड़ सकता

ना नाराज़ कर सकता

ख्यालों के

चौराहे पर खडा हूँ

निरंतर खुद से पूंछता हूँ

इसे देखूं या उसे देखूं ?

या रज़ा

उनकी पूँछ लूं ?

28-07-2011

1258-142 -07-11

जहाँ में खिले

इक ज़मीं पर

इक आसमाँ में

दोनों अक्स इक दूजे के

दिल सोच में फँसा

किसे देखूं ,किसे ना देखूं

दोनों टुकड़े दिल के मेरे

ना दिल तोड़ सकता

ना नाराज़ कर सकता

ख्यालों के

चौराहे पर खडा हूँ

निरंतर खुद से पूंछता हूँ

इसे देखूं या उसे देखूं ?

या रज़ा

उनकी पूँछ लूं ?

28-07-2011

1258-142 -07-11