निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
Friday, January 20, 2012
नहीं चाहता तूँ बदनाम हो जाए
Friday, August 12, 2011
निरंतर उम्मीद में जीता हूँ मैं
देखते थे
जिस शीशे में वो
उस शीशे को रोज़
गौर से देखता हूँ मैं
अक्स गर छुपा हो
उनका कहीं उसमें
ढूंढता हूँ मैं
उसे देख कर ही
सुकून मिल जाएगा
ख्याल जहन में
रखता हूँ मैं
निरंतर उम्मीद में
जीता हूँ मैं
12-08-2011
1348-70-08-11
Thursday, July 28, 2011
इसे देखूं या उसे देखूं ?
जहाँ में खिले
इक ज़मीं पर
इक आसमाँ में
दोनों अक्स इक दूजे के
दिल सोच में फँसा
किसे देखूं ?,
किसे ना देखूं ?
दोनों टुकड़े दिल के मेरे
ना दिल तोड़ सकता
ना नाराज़ कर सकता
ख्यालों के
चौराहे पर खडा हूँ
निरंतर खुद से पूंछता हूँ
इसे देखूं या उसे देखूं ?
उनकी पूँछ लूं ?
28-07-2011
1258-142 -07-11
जहाँ में खिले
इक ज़मीं पर
इक आसमाँ में
दोनों अक्स इक दूजे के
दिल सोच में फँसा
किसे देखूं ,किसे ना देखूं
दोनों टुकड़े दिल के मेरे
ना दिल तोड़ सकता
ना नाराज़ कर सकता
ख्यालों के
चौराहे पर खडा हूँ
निरंतर खुद से पूंछता हूँ
इसे देखूं या उसे देखूं ?
उनकी पूँछ लूं ?
28-07-2011
1258-142 -07-11