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Wednesday, December 19, 2012

कभी कभी जीवन में



कभी कभी जीवन में
ऐसा समय भी आता है
जब अपने भी पराये
लगते हैं
रिश्ते नाते अविश्वास के
घेरे में घिर जाते हैं
आशाओं के आकाश
निराशा के बादलों से
ढक जाते हैं
भावनाओं के बाँध
टूट जाते हैं 
केवल आसूं ही मनुष्य
का साथ निभाते हैं
965-84-19-12-2012
रिश्ते नाते,अविश्वास,विश्वास, जीवन, आशा ,निराशा

Saturday, December 15, 2012

मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ



मैं तुमसे कुछ कहना
चाहता हूँ
पर कहते हुए डरता हूँ
कहते कहते रुक जाता हूँ
मन की इच्छाओं को
अपने भीतर समेट लेता हूँ
कैसे कहूँ के चक्रव्यूह में
उलझ जाता हूँ
या तो मुझे तुम पर
या मुझे खुद पर विश्वास नहीं
मैं तुम्हें,तुम मुझे ठीक से
समझ नहीं पाए
तुम भी प्रयत्न करो
मैं भी प्रयत्न करूंगा
पहले रिश्तों को सुद्रढ़ बनाएं
शक को रिश्तों से दूर हटायें
फिर तुम मुझे मैं तुम्हें
मन की बात कह पाऊंगा
ना डरूंगा ना घबराऊंगा
955-74-15-12-2012
जीवन,विश्वास,अविश्वास ,उलझन,रिश्ते