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Thursday, March 15, 2012

जब अपने ही बदल जाएँ ,तो कोई क्या करे

किस किस ने
क्या क्या किया साथ
हमारे
कैसे दिया दोस्ती का
सिला
कैसे बताएं
हँसी हमारी ही उडायी
जायेगी
क्यूँ किया था ऐतबार
हमें ही कहा जाएगा
हम भी कैसे कहेंगे
सब के सब अपने थे
दिल के हिस्से थे
जब अपने ही बदल
जाएँ
तो कोई क्या करे  
15-03-2012
381-115-03-12

Monday, March 12, 2012

मच चुका हंगामा महफ़िल-ऐ-ज़िन्दगी में बहुत


मच चुका हंगामा
महफ़िल-ऐ-ज़िन्दगी
में बहुत
कैसे अमन कायम करूँ
अब ज़हन में सिर्फ
यही सवाल है
किस पर ऐतबार करूँ
किस पर शक करूँ
अब समझ से बाहर है
लगता है 
खुद और खुदा के
सिवाय
कोई और अब  
काम नहीं आयेगा
12-03-2012
350-83-03-12

Tuesday, September 27, 2011

गुनाह से पहले कातिल ना समझो मुझ को

नज़रें चुराते हो तुम
डर से सहमते हो तुम
निरंतर
बहम से जीते हो तुम
सब को एक नज़र से
देखते हो तुम
कसूर तुम्हारा भी नहीं
कई बार भुगता तुमने
हँस के लुभाया
मुस्कान से भरमाया
लोगो ने
खंजर पीठ में भोंका
लोगो ने
मैं ना कहता तुम
ऐतबार करो मुझ पर
कम से कम निरंतर
शक ना करो मुझ पर
गुनाह से पहले
कातिल ना समझो
मुझ को
इतनी सी दया करो
मुझ पर    
27-09-2011
1569-140-,09-11