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Monday, June 20, 2011

निरंतर फक्कड़ रहा हूँ , फक्कड़ ही रह लूं

चार गाडी खरीद लूं
देश विदेश की सैर कर लूं
कुछ सोना,चांदी खरीद लूं
धनवानों में गिनती होगी
आगे पीछे भीड़ होगी
मेरी भी पूछ होगी
छाती चौड़ी होगी
मन को तसल्ली होगी
फिर रातों की नींद उडेगी
चोरी की चिंता रहेगी
लोगों को जलन होगी
रंजिश में शिकायतें होगी
इनकम टैक्स वालों की 
जांच होगी
छुपी बातें बाहर आयेंगी 
वकील की जरूरत पड़ेगी
मोटी फीस देनी पड़ेगी
ज़िन्दगी हराम होगी
मरने की इच्छा करेगी
जब मरना ही है
तो क्यूं सब खरीदूं ?
निरंतर फक्कड़ रहा हूँ
फक्कड़ ही रह लूं
यूँ ही ख्वाब देखता रहूँ
अमीरी,गरीबी
 ख़्वाबों में देख लूं
टाइम पास करने के लिए
आखिर कुछ तो करूँ
20-06-2011
1078-105-06-11