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Wednesday, October 24, 2012

हम खुद को बहुत हूनरमंद समझते थे



हम खुद को बहुत
हूनरमंद समझते थे
रूठे मौसम को
मना लेते थे
खिजा को बहार में
 बदल देते थे
जब मामला
दिल का आया तो
मात खा गए
उन्हें हर तरीके से
मनाया
पर मना ना सके
787-29-24-10-2012
प्यार,प्रेम,हूनरमंद, खिजा,बहार

Tuesday, July 12, 2011

गम-ऐ-उल्फत में कलम उठा ली

गम-ऐ-उल्फत में
कलम उठा ली
दिल की तकलीफें
कागज़ पर लिख दी
किस्मत खराब थी
एक इबारत भी
उन्होंने नहीं पढी
वरना किस्मत
 बदल गयी होती
मैं यहाँ,
वो वहां नहीं होती
खिजा बहार में
बदल जाती
ज़िन्दगी मौत से
बदतर नहीं होती
निरंतर
सुकून से गुजरती  
12-07-2011
1169-53-07-11
  (उल्फत=मोहब्बत के गम में, इबारत =लाइन ,खिजा=पतझड़)

Monday, July 4, 2011

ऋतु बसंत की आयी ,बहार फूलों की लायी

ऋतु बसंत की आयी
बहार फूलों की लायी
चेहरों पर खुशी छायी
कोयल की कूंक गूंजे
पपीहा पीहू पीहू बोले
भँवरे निरंतर गीत गायें
फूलों पर आँख गढ़ाए
गुंजन से उन्हें लुभाए
प्रेम रस से ह्रदय भीगे
प्रेमी जोड़ों के मन डोले
पेड़ों में नए पत्ते आये
हरयाली पंछियों को बुलाये
मौसम ने अंगडायी ली
शीत की विदाई हुयी
हवा में गर्मी आयी
रंगों की बरसात हुयी
होली पर मस्ती छाई
साजों की जाजम बिछी
संगीत गोष्ठी सजने लगी
गीतों की स्वर-लहरी गूंजी
ऋतु बसंत की आयी
जीवन में आशाएं लायी
04-07-2011
1131-15-07-11