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Friday, October 21, 2011

बिछड़ने से पहले ही क्यूं बिछड़ गए ?


बिछड़ने से पहले ही
क्यूं बिछड़ गए ?
पास रह कर भी दूर
क्यूं हो गए ?
फासले दिलों के
क्यूं बढ़ गए ?
सोचने का तरीका
जुदा हो सकता है
ख्यालों में फर्क हो
सकता है
इसका मतलब ये तो नहीं
तुम हमको दुश्मन
समझने लगो
निरंतर रश्क करने लगो 
अपना हो कर भी पराया
समझने लगो
हमेशा दिल से चाहा
तुमको
क्यूं अब जान के प्यासे
हो गए ?
21-10-2011
1683-90-10-11

Saturday, July 16, 2011

जीवन का अंतिम समय आ गया था

सांस लेने में निरंतर
कठिनायी हो रही थी
आँखें बार बार
बंद हो रही थी
दृष्टि भी मंद हो गयी
जुबान काँप रही थी
मुख से अस्पष्ट स्वर
निकल रहे थे
हाथ उठाने की कोशिश
 करता
हिल कर रह जाता
पास खड़े लोगों को
पहचानने का प्रयत्न करता
विफल होता
दिमाग पर जोर डालता
क्यों ऐसा हो रहा ?
समझ नहीं पा रहा था
चेहरा भावहीन
चिंतामुक्त था
शरीर जवाब दे रहा था
उसे पता नहीं था
आ गया था
अपनों से बिछड़ने का
संसार से जाने का
समय हो गया था
16-07-2011
1191-73-07-11