मैं
बुलबुला पानी का
हवा से भरा
पानी से जन्मा
जब तक वजूद मेरा
अठखेलियाँ करता
निरंतर
साथ पानी के बहता
लहरों के साथ मचलता
जिस दिन फूट जाऊंगा
याद किसी को ना
आऊँगा
पानी में मिल जाऊंगा
पानी बन बह
जाऊंगा
28-03-03
534—204-03-11
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )