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Friday, February 3, 2012

उसे खुदा का दर्ज़ा दे दूं


जब सूरज
थका मांदा सा
ढलने वाला हो 
पहाड़ों के पीछे
छुपने वाला हो
शाम धीरे धीरे
कदम बढ़ा रही हो
मेरे चेहरे पर
मायूसी छाने लगे
उस वक़्त
अगर वो आ जाए
मेरी आँखों की चमक
लौट जाए
चेहरा दमकने लगे
वो आगे बढ़ कर
मेरी पलकों को
चूम ले
मैं चाँद सितारों के
बीच पहुँच जाऊं
खुद को ज़न्नत का
फ़रिश्ता समझने लगूं
उसे खुदा का दर्ज़ा
दे दूं
03-02-2012
101-11-02-12

Tuesday, December 20, 2011

हँसने की आदत थी हमारी


हँसने  की
आदत थी हमारी
अब मुस्कारने में भी
दिक्कत होती है
कभी रोने की फितरत
नहीं थी हमारी
अब बहुत ज़ल्द आँखें
नम होती हैं
अलमस्त घूमते थे कभी
अब घर से
बाहर निकलने की
इच्छा भी नहीं करती
ऐसा नहीं
की कमज़ोर हैं हम
क्या करें
उस दौर की यादें तंग
करती हैं
निरंतर हँसते चेहरे पर
मायूसी लाती हैं
20-12-2011
1872-40-12