निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
Thursday, February 9, 2012
सोचा आज बता ही दूं
Monday, July 25, 2011
एक लेखक की कहानी
मांग कर खाने की
आदत ने भी
उसे निठल्ला नहीं
बनने दिया
मांगने के नए तरीके
ढूँढने में
मेहनत करने लगा
शादी ब्याह में
साफ़ सुथरे कपडे पहन
मेहमान बन भोजन का
आनंद लेने लगा
दिल को छू जाए
ऐसी कहानी सुना
सहानभूती बटोरने लगा
निरंतर पैसे कमाने लगा
नयी कहानियां गढ़ना
उसका शौक हो गया
धीरे धीरे कागज़ पर
लिखने लगा
अच्छे कहानीकारों की
जमात में शामिल
हो गया
अब सम्मानित लेखक है
पर मांगना,
कहानी सुना कर
भावनाओं में बहाना
पैसे कमाना नहीं छूटता
पहले मांग कर खाता
अब लिख और सुनाकर
कमाता
जो एक बार फंसता
तौबा करता
लेखकों से दूर रहता
दोस्तों को इनसे
बचने की
सलाह भी देता
25-07-2011
1227-107-07-11
(काव्यात्मक लघु कथा)