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Monday, April 15, 2013

कौन सदा हुआ किसी का



कौन सदा हुआ किसी का
किसने सदा साथ निभाया
किसी का
दो जिस्म एक जान भी
बिछड़े इक दिन
इक रह गया इक चला गया
क्यों उम्मीद करते हो फिर तुम
बिछड़ेंगे नहीं कभी हम तुम
बांधते हो झूठी आशाएं मन में
सच से दूर
रहते हो तुम
मन को कठोर कर लो
सच को स्वीकार लो तुम
हमें भी इक दिन अलग होना है
किसी को पहले किसी को
बाद में जाना है
छोड़ दो मोह
जी लो खुशी से
जब तक जीना है
बस सुख दुःख में
साथ निभा लो तुम
22-78-15-02-2013
जीवन,साथ ,साथी
डा.राजेंद्र तेला,निरंतर

Thursday, September 13, 2012

कभी कोई बुलाने पर भी नहीं आता



कैसी विडंबना है
कभी कोई बुलाने पर भी
नहीं आता
कभी बिना बुलाये भी
घर लोगों से भर जाता है
जब मन की संतुष्टी के लिए
एक साथ ही बहुत होता
वो भीड़ में भी नहीं मिलता
 इंसान
खुद को अकेला समझता
निरंतर
मन के अनुरूप साथ की
तलाश में भटकता रहता
सदा असंतुष्ट रहता
13-09-2012
730-26-09-12


Saturday, September 10, 2011

कोई तो लम्बी दूर तक साथ चले

कोई तो
लम्बी दूर तक
साथ चले
मेरी बात समझ ले
मेरे दिल में
झाँक कर देख ले
निरंतर
मेरा इंतज़ार करे
दिल से
स्वीकार कर ले
मुझे अपना
समझ ले
10-09-2011
1476-48--09-11

Monday, April 4, 2011

अपनी,अपनी बातें

अपनी,अपनी
बातें कहते रहे
कुछ  ना  कुछ
लिखते  रहे,
एक  दूजे का
साथ निभाते रहे
आगे बढ़ते रहे
निरंतर
कदम से कदम
मिला कर चलते
रहे
01-04-2011
595—28 -04-11

Saturday, April 2, 2011

कौन साथ किसका निभाता ?


कौन साथ
किसका निभाता ?
साथ किस्मत से
छूटता
दिल नया साथ
ढूंढता
यादों के भंवर में
फिर किनारा ढूंढता
नया
साथ मिल भी जाए
पुराना कहाँ भूलता
लम्हा,लम्हा लौटता
रहता 
निरंतर ज़ख्मों को
हरा करता रहता
02-04--11
582—15 -04-11