Showing posts with label बातें. Show all posts
Showing posts with label बातें. Show all posts

Thursday, June 7, 2012

लोगों ने पत्थर तो नहीं फैंके




लोगों ने
पत्थर तो नहीं फैंके
बातों से
ही मारा मुझ को
बातों में वज़न
पत्थर से भी ज्यादा था
इतना कि
उठ ही नहीं सका
दोबारा
मैं फूल समझ कर
झेलता गया
उनकी हर मार पर
हंसता रहा
उनकी जुबान में
जवाब ना दे सका
अपना समझ
सहता रहा
07-06-2012
585-35-06-12

Friday, March 9, 2012

जीत का सेहरा

मैं तो एक दिन
दुनिया से चला जाऊंगा
छोड़ जाऊंगा पीछे
कुछ रिश्ते
कुछ पैसे ,कुछ सामान
मेरा मकान
जिस में,मैं रहता हूँ
रह जायेंगी
कुछ यादें,कुछ बातें
जिन्हें याद कर कोई
हँसेगा
कोई दुःख मनायेगा
किसी को याद आऊँगा
कोई भूल जाएगा
समय के साथ सब
धुंधला होता जाएगा 
पर मेरी लिखी
कविताओं को कोई नहीं
मिटा सकेगा
उनमें छुपी बातों को
कोई नहीं हटा सकेगा
उनमें मेरा सोच है
मेरे मन के भाव हैं
जो भी ह्रदय कहता
वो सब भरा है
क्या भुगता,क्या सहा
क्या मिला,क्या ना मिला
क्या करा,क्या ना करा 
सब का अम्बार है
जो भी पढेगा उनको
समझेगा मुझको
यह ही क्या कम होगा
मेरे जाने के बाद
मुझे वह मिलेगा
जो जीते जी
नहीं मिल सका मुझे
जीवन भर
हारते रहने के बाद तो
जीत का सेहरा
बंधेगा मेरे
09-03-2012
332-66-03-12

Tuesday, July 26, 2011

वो आज कल बातों से बहलाते

वो आज कल

बातों से बहलाते

किसी तरह पीछा

छुडाते

समझते हम हकीकत

ना जानते

हम भी रंजो गम में

वक़्त गुजारते

निरंतर उन्हें बहलाने को

बात करते

वक़्त बदल जाने का

इंतज़ार करते

26-07-2011

1236-116-07-11

Monday, April 4, 2011

अपनी,अपनी बातें

अपनी,अपनी
बातें कहते रहे
कुछ  ना  कुछ
लिखते  रहे,
एक  दूजे का
साथ निभाते रहे
आगे बढ़ते रहे
निरंतर
कदम से कदम
मिला कर चलते
रहे
01-04-2011
595—28 -04-11