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Tuesday, December 11, 2012

कौन मरना चाहता है?



कौन मरना चाहता है?
मौत फिर भी आती है
कौन असफलता चाहता है ?
फिर भी हर बार
सफलता नहीं मिलती
यही है मर्म जीवन का
जिसने जान लिया 
उसका जीवन सरल
हो जाता है
जो नहीं जान सका
वो जीवन भर बेचैन
रहता है
928-46-12-12-2012
जीवन ,जीवन मर्म,सफलता,असफलता

Sunday, September 23, 2012

जब भी……..



जब भी
बार बार असफलता
हाथ लगती है
निराशा मन में घर
बनाने लगती
मन खिन्नता से भर जाता
समय ठहर जाता
चेहरे पर
अवसाद झलकने लगता
दिन ढलता नहीं
नींद बुलाने से भी आती नहीं
पथ कठिन
लक्ष्य दूर लगने लगता
आकान्शाएं मरने लगती
इरादे धूमिल होने लगते
कदम डगमगाने लगते
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
ऐसे में
स्वयं पर विश्वास
इश्वर में आस्था
धीरज और संयम रखना ही
एकमात्र सहारा होता
752-48-23-09-2012
असफलता,खिन्नता,अवसाद,आकान्शाएं
लक्ष्य,इरादे ,आस्था,इश्वर ,विश्वास,संयम ,धीरज

Saturday, February 18, 2012

सफलता केवल चाहने से नहीं मिलती

सफलता केवल
चाहने से नहीं मिलती
कर्म के साथ मेहनत भी
आवश्यक होती
सफलता ना मिले तो
सब्र भी रखनी होती
असफलता का दोष
दूसरों पर डालने की
प्रवत्ती घातक होती
स्वयं भी
आत्म मंथन करो
गुरओं और बड़ों से
मार्गदर्शन लो
कारण जानने का
प्रयत्न करो
एक बात और समझ लो
नाकाम ही देते हैं दोष
दूसरों को
रोते रहने से असफल
कभी सफल नहीं होते
जो सफल हुए 
उनसे भी सीख लो
प्रयत्न करते रहो 
हिम्मत होंसले से 
लड़ते रहो
ना हताश हो 
ना निराश हो
निरंतर हँसते हुए
आगे बढ़ते रहो
सफलता एक दिन
कदम चूमेगी
चेहरे पर आजीवन
मुस्काराहट रहेगी
18-02-2012
189-100-02-12

Sunday, July 24, 2011

ज़िन्दगी फ़ुटबाल का खेल

ज़िन्दगी

फ़ुटबाल का खेल

गेंद कभी इधर

कभी उधर रहती

कभी चोट खाते

कभी

ज़मीन पर गिरते

कभी गेंद गोल में

कभी गोल के बाहर

रहती

कभी विपक्षी भारी

कभी हम भारी

निरंतर

गम और खुशी साथ

चलती रहती

ध्यान

जिसका गेंद पर

वह जीतता

ध्यान हटाने वाला

निरंतर हारता

जीत के लिए खेलना

ज़रूरी

हार जीत खेलने से

होती

बिना खेले ज़िन्दगी

अधूरी रहती

24-07-2011

1222-102-07-11