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Sunday, September 11, 2011

जीवन खेल का मैदान ,जीना एक खेल है

जीवन खेल का मैदान
जीना एक खेल है
हर जीत का सवाल
कहाँ ?
जो जैसा खेलेगा
नतीजा वैसा होगा
बेईमानी से खेलोगे
दूसरे खिलाड़ी को
टांग अड़ा कर
गिराओगे
एक दिन तुम भी
गिर जाओगे
खेल भावना से खेलोगे
सब को भाओगे
कोई ज़ल्दी थकेगा
खेल बीच में छोड़ेगा
कोई अंत तक खेलेगा
हार ना मानेगा
जी जान लड़ा देगा
निरंतर जीवन को
खेल समझेगा
आनंद और खुशी से
जीवन जियेगा
जीवन खेल का मैदान
जीना एक खेल है
10-09-2011
1481-53--09-11

Wednesday, July 27, 2011

मुझसे खफा ना हुआ करो

मुझसे खफा ना

हुआ करो

बार बार दिल

दुखाया ना करो

या तो जुदा हो जाओ

या साथ पूरा निभाओ

तिल तिल कर मारा

ना करो

यूँ दिल से खेलने का

शौक पूरा ना करो

निरंतर मरने से

एक बार जान देना

अच्छा

तुम्हें कोई और मिल

जाएगा

दिल फिर से बहल

जाएगा

27-07-2011

1251-135 -07-11

Sunday, July 24, 2011

ज़िन्दगी फ़ुटबाल का खेल

ज़िन्दगी

फ़ुटबाल का खेल

गेंद कभी इधर

कभी उधर रहती

कभी चोट खाते

कभी

ज़मीन पर गिरते

कभी गेंद गोल में

कभी गोल के बाहर

रहती

कभी विपक्षी भारी

कभी हम भारी

निरंतर

गम और खुशी साथ

चलती रहती

ध्यान

जिसका गेंद पर

वह जीतता

ध्यान हटाने वाला

निरंतर हारता

जीत के लिए खेलना

ज़रूरी

हार जीत खेलने से

होती

बिना खेले ज़िन्दगी

अधूरी रहती

24-07-2011

1222-102-07-11

Tuesday, March 29, 2011

क्रिकेट के जुनून में,खुद को भूल गए


 मायूस
मायूसी भूल गए
बीमार
बीमारी भूल गए
निरंतर चिंता
रोटी की करते थे
क्रिकेट के चक्कर में
रोटी भूल गए
देश दोस्ती की बात
करने लगे
अपनी दुश्मनी भूल गए
साथ खा रहे,साथ पी रहे
क्रिकेट के जुनून में
खुद को भूल गए
सिर्फ क्रिकेट जहन में
बाकी सब कुछ
भूल गए
29-03-03
547—217-03-11