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Saturday, December 15, 2012

भोर जब चेहरा दिखाने लगी



भोर जब
चेहरा दिखाने लगी
रात मुंह छुपाने लगी
मन ही मन सोचने लगी
अब उसे जाना होगा
सूरज के ताप से
बचना होगा
फिर लौटना हो तो
सूरज अस्त ना हो
तब तक
धीरज और धैर्य
रखना होगा
हिम्मत होंसले से
काम लेना होगा
तब तक अविचल
शांती से बैठना होगा
941-60-15-12-2012
हिम्मत,होंसला,धीरज,धैर्य,जीवन,भोर,अविचल 

Tuesday, November 6, 2012

कभी कभी इतना कमज़ोर कैसे हो जाता हूँ


कभी कभी इतना कमज़ोर कैसे हो जाता हूँ
कभी कभी
इतना कमज़ोर
कैसे हो जाता हूँ
सच को झूठ
झूठ को सच मान
बैठता हूँ
पथ से भटक जाता हूँ
दुखों से घबरा कर
ह्रदय में डर बिठा लेता हूँ
संतुलन खो बैठता हूँ
क्या स्वयं से
विश्वास खो बैठा हूँ
शांत मन से सोचता हूँ
आत्ममंथन करता हूँ
नतीजे पर पहुंचता हूँ
फिर से
पथ पर आने के लिए
धीरज रखना होगा
सहनशील बनना होगा
होंसला रखना होगा
हिम्मत से लड़ना होगा
फिर से मुस्काराना होगा
स्वयं पर
विश्वास रखना होगा
832-16-06-11-2012
जीवन,सहनशील,धीरज,संतुलन,विश्वास,आत्ममंथन,हिम्मत

Sunday, September 23, 2012

जब भी……..



जब भी
बार बार असफलता
हाथ लगती है
निराशा मन में घर
बनाने लगती
मन खिन्नता से भर जाता
समय ठहर जाता
चेहरे पर
अवसाद झलकने लगता
दिन ढलता नहीं
नींद बुलाने से भी आती नहीं
पथ कठिन
लक्ष्य दूर लगने लगता
आकान्शाएं मरने लगती
इरादे धूमिल होने लगते
कदम डगमगाने लगते
कुछ भी अच्छा नहीं लगता
ऐसे में
स्वयं पर विश्वास
इश्वर में आस्था
धीरज और संयम रखना ही
एकमात्र सहारा होता
752-48-23-09-2012
असफलता,खिन्नता,अवसाद,आकान्शाएं
लक्ष्य,इरादे ,आस्था,इश्वर ,विश्वास,संयम ,धीरज