Showing posts with label आगोश. Show all posts
Showing posts with label आगोश. Show all posts

Friday, August 12, 2011

निरंतर इंतज़ार के बाद उनका पैगाम आया

निरंतर
इंतज़ार के बाद
उनका पैगाम आया
सुबह मिलने का
वक़्त तय हुआ
रात भर उम्मीद में
जागता रहा
सुबह मिलने का
वक़्त आया
नींद के आगोश में
खो चुका था
नींद खुली बहुत
देर हो चुकी थी
उन्होंने
किसी और का हाथ
थाम लिया था

11-08-2011

1338-60-08-11

Monday, August 1, 2011

उन हसरतों का क्या करूँ ? जिन्हें पूरा ना कर सकूँ

उन निगाहों का क्या करूँ?

जिनमें डूब ना सकूँ

उन होठों का क्या करूँ ?

जिन्हें चूम ना सकूँ

उस सूरत का क्या करूँ ?

जिसे ख़्वाबों में ना देख सकूँ

उन गीतों का क्या करूँ ?

जिन्हें सुना ना सकूँ

निरंतर

दूर से उसे देखता रहूँ

आगोश में लेने के लिए

तड़पता रहूँ

उन हसरतों का क्या करूँ ?

जिन्हें पूरा ना कर सकूँ

01-08-2011

1285-07-08-11