आज मैंने उन्हें
मुस्कराते देख लिया
खुद को
मोहब्बत के जाल में
फंसा दिया
हसरतों को न्योता
दे दिया
खुद की मुस्काराहट को
उनके नाम कर दिया
बेचैनी का दामन
थाम लिया
02-06-2012
555-75-05-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
इंतज़ार तुम्हारा
ज़िन्दगी भर किया
रातों को जागता रहा
निरंतर
अश्क बहाता रहा
इज़हार-ऐ-मोहब्बत का
जवाब ना मिला
मेरे हसरतों का खून
हो गया
अब आखिरी इल्तजा
सुन लो मेरी
मरने के बाद
सुकून के खातिर
दो मुट्ठी मिट्टी मेरी
कब्र पर डाल देना
जो मुझे ना मिल सका
मेरी लाश को दे देना
डाल देना
12-08-2011
1347-69-08-11