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Saturday, June 2, 2012

बेचैनी का दामन थाम लिया


आज मैंने उन्हें
मुस्कराते देख लिया
खुद को
मोहब्बत के जाल में
फंसा दिया
हसरतों को न्योता
दे दिया
खुद की मुस्काराहट को
उनके नाम कर दिया
बेचैनी का दामन
थाम लिया
02-06-2012
555-75-05-12

Tuesday, March 13, 2012

चाहत की इन्तहां तो देखिये

कौन है
जिसने किसी से
दिल नहीं लगाया कभी
दिल धडका नहीं 
देख कर किसी को कभी
कुछ को मिल गयी
मंजिल
पहली मुलाक़ात में
कुछ को मिली बहुत
इंतज़ार के बाद
कुछ ऐसे भी जो बैठे हैं
हसरतों को दिल में
दबाये हुए अभी तक
कब होगी
मुलाक़ात साहिल से
कब पायेंगे
निजात दिल के दर्द से
उन्हें पता नहीं
पर उनकी चाहत की
इन्तहां तो देखिये
होंसला नहीं खोते हैं
इंतज़ार में
हर खूबसूरत चेहरे को
देख कर मुस्काराते हैं
नित नए ख्वाब बुनते हैं
13-03-2012
359-93-03-12

Tuesday, January 3, 2012

अपने ज़ज्बातों को कैसे छुपाऊँ?


अपने
ज़ज्बातों को कैसे
छुपाऊँ?
दिल की आग को कैसे
बुझाऊँ
चाहत को सीने में
दबा कर कैसे रखूँ?
ख्यालों के समंदर को
उफनने से कैसे रोकूँ?
ख्वाबों में उनसे कैसे
ना मिलूँ?
हसरतों को मचलने
कैसे ना दूं?
क्यूं ना उनसे ही
पूछ लूं?
ज़रिये नज़्म
हाल-ऐ-दिल बता दूं
या तो वो समझ जायेंगे
ज़रिये पैगाम
अपनी रज़ा बता देंगे
नहीं तो मोहब्बत पर
एक और नज़्म
समझ कर पढ़ लेंगे
मेरे अरमानों को
ठंडा कर देंगे
03-01-2012
12-12-01-12

Saturday, December 24, 2011

हमारी खता की सज़ा उन्हें कैसे दें ?


हमारी
हसरतों का कातिल
उन्हें कैसे कहें ?
हमारी खता की सज़ा
उन्हें कैसे दें ?
गर्दिश-ए-हालात की 
ज़िम्मेदारी उनकी नहीं
उनकी रुसवाई भी
उनकी नहीं
कुछ किस्मत ही हमारी
ऐसी थी
हम ही ना रख सके
उन्हें सम्हाल कर
लगा ना सके
अरमानों की किश्ती
 किनारे पर
उनके मुस्काराने को
मोहब्बत समझा था
हमने
वादों को हकीकत
माना था  हमने 
24-12-2011
1886-54-12

Tuesday, December 13, 2011

तेरी बराबरी कैसे करूँ?


निरंतर सोचता हूँ
दर्द-ऐ-दिल
दुनिया को सुनाऊँ
बीते लम्हों  का
अफ़साना बताऊँ
जुबां खोलते हुए
डरता हूँ
ज़िक्र तेरा भी करना
होगा
तेरी बेवफाई का
आलम बताना पडेगा
तुझे बदनाम होना
पडेगा
उसे कैसे छुपाऊँ?
अधूरी हसरतों से
नकाब कैसे हटाऊँ?
बेफफायी का बदला
बेवफाई से क्यों दूं  ?
दिल से चाहा है तुझे
तेरी बराबरी कैसे करूँ?
इस लिए खामोश
रहता हूँ
चुपचाप सहता हूँ
14-12-2011
1860-28-12

Monday, October 10, 2011

कल रात आसमान में सूरज निकल गया


कल रात
आसमान में सूरज
निकल गया
सारा जहां रोशनी से
जगमगा गया
मुझे उन का खूबसूरत
चेहरा दिख गया
जहन में उसका अक्स
ज़ज्ब हो गया
हसरतों को मुकाम
मिल गया
सुबह से शाम
ठंडी आहें भरता रहा
निरंतर
यादों में खोता रहा
रात का
इंतज़ार करता रहा
10-10-2011
1632-40-10-11

Friday, August 26, 2011

जो चाहा किसे मिला अब तक ?

किसे मिला अब तक ?
जो भी मिला
अधूरा लगा अंत तक
ख्वाइश की चाहत में
क्या नहीं किया उसने
हर मुस्काराहट को
हकीकत समझा उसने
रोशनी की
हर किरण को निरंतर
मुकाम समझा उसने
उम्मीद में हसरतों को
जगाये रखा उसने  
26-08-2011
1399-121-08-11

Friday, August 12, 2011

दो मुट्ठी मिट्टी मेरी कब्र पर डाल देना

इंतज़ार तुम्हारा

ज़िन्दगी भर किया

रातों को जागता रहा

निरंतर

अश्क बहाता रहा

इज़हार-ऐ-मोहब्बत का

जवाब ना मिला

मेरे हसरतों का खून

हो गया

अब आखिरी इल्तजा

सुन लो मेरी

मरने के बाद

सुकून के खातिर

दो मुट्ठी मिट्टी मेरी

कब्र पर डाल देना

जो मुझे ना मिल सका

मेरी लाश को दे देना

अपनी बेरुखी पर पर्दा

डाल देना

12-08-2011

1347-69-08-11