उलझन से बचने
के लिए हमने उनकी
इज़हार-ऐ-मोहब्बत
का जवाब ना दिया
उन्होंने तौहीन समझ
दिल से लगा लिया
अपनी चाहत को
नफरत में बदल दिया
सारे शहर में बदनाम
कर दिया
उनकी फितरत ने
हमें उलझन में
ड़ाल दिया
12-02-2012
158-69-02-12
निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
इंतज़ार तुम्हारा
ज़िन्दगी भर किया
रातों को जागता रहा
निरंतर
अश्क बहाता रहा
इज़हार-ऐ-मोहब्बत का
जवाब ना मिला
मेरे हसरतों का खून
हो गया
अब आखिरी इल्तजा
सुन लो मेरी
मरने के बाद
सुकून के खातिर
दो मुट्ठी मिट्टी मेरी
कब्र पर डाल देना
जो मुझे ना मिल सका
मेरी लाश को दे देना
डाल देना
12-08-2011
1347-69-08-11
तुम भी निरंतर
पढ़ते होगे
हमारी चाहत को
समझ गए होगे
देर किस बात की
मुंह से हाँ कह दो
नहीं तो
हमारी तरह लिख कर
बता दो
तुम भी कर दो
हम भी समझ
जायेंगे
दिल की आग को
बुझा लेंगे
07-08-2011
1314-36-08-11