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Sunday, February 12, 2012

उलझन

उलझन से बचने
के लिए हमने उनकी
इज़हार-ऐ-मोहब्बत
का जवाब ना दिया
उन्होंने तौहीन समझ
दिल से लगा लिया
अपनी चाहत को
नफरत में बदल दिया
सारे शहर में बदनाम
कर दिया
उनकी फितरत ने
हमें उलझन में
ड़ाल दिया
12-02-2012
158-69-02-12

Thursday, January 19, 2012

बस इतना सा बता दो


उनसे 
मुलाक़ात हुयी
कई मुद्दों पर गुफ्तगू हुयी
कुछ दिल को अच्छी लगी
कुछ मन को भायी
जाते जाते
मैंने पूछ लिया उनसे
क्या सोचते हैं वो
हमारे बारे में
उन्होंने जवाब नहीं दिया
बस मुस्कारा कर रह गए
फिर नज़रें  झुका कर
धीरे से बोले
कब फिर मिलोगे
बस इतना सा बता दो
19-01-2012
64-64-01-12

Friday, August 12, 2011

दो मुट्ठी मिट्टी मेरी कब्र पर डाल देना

इंतज़ार तुम्हारा

ज़िन्दगी भर किया

रातों को जागता रहा

निरंतर

अश्क बहाता रहा

इज़हार-ऐ-मोहब्बत का

जवाब ना मिला

मेरे हसरतों का खून

हो गया

अब आखिरी इल्तजा

सुन लो मेरी

मरने के बाद

सुकून के खातिर

दो मुट्ठी मिट्टी मेरी

कब्र पर डाल देना

जो मुझे ना मिल सका

मेरी लाश को दे देना

अपनी बेरुखी पर पर्दा

डाल देना

12-08-2011

1347-69-08-11

Monday, August 8, 2011

इज़हार-ऐ-मोहब्बत तुम भी कर दो

जो लिखता हूँ

तुम भी निरंतर

पढ़ते होगे

हमारी चाहत को

समझ गए होगे

देर किस बात की

मुंह से हाँ कह दो

नहीं तो

हमारी तरह लिख कर

बता दो

इज़हार-ऐ-मोहब्बत

तुम भी कर दो

हम भी समझ

जायेंगे

दिल की आग को

बुझा लेंगे

07-08-2011

1314-36-08-11