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Tuesday, January 3, 2012

अपने ज़ज्बातों को कैसे छुपाऊँ?


अपने
ज़ज्बातों को कैसे
छुपाऊँ?
दिल की आग को कैसे
बुझाऊँ
चाहत को सीने में
दबा कर कैसे रखूँ?
ख्यालों के समंदर को
उफनने से कैसे रोकूँ?
ख्वाबों में उनसे कैसे
ना मिलूँ?
हसरतों को मचलने
कैसे ना दूं?
क्यूं ना उनसे ही
पूछ लूं?
ज़रिये नज़्म
हाल-ऐ-दिल बता दूं
या तो वो समझ जायेंगे
ज़रिये पैगाम
अपनी रज़ा बता देंगे
नहीं तो मोहब्बत पर
एक और नज़्म
समझ कर पढ़ लेंगे
मेरे अरमानों को
ठंडा कर देंगे
03-01-2012
12-12-01-12

Tuesday, September 13, 2011

उनका मुस्काराना हुआ इक नज़्म का जन्म हुआ

उनका
मुस्काराना हुआ
इक नज़्म का
जन्म हुआ
ख्याल
उड़ान भरने लगे
लफ्ज़ अपने आप
जहन में आने लगे
अरमान 
कुलांचें भरने लगे
कलम बिना रुके
निरंतर चलती रही
उनकी ख़ूबसूरती
ख्यालों में उतर आयी 
उनकी तारीफ़ में लिखी
नज़्म वजूद में आयी
दिल की ख्वाइश
अब आम हो गयी
12-09-2011
1493-65-09-11

Tuesday, July 26, 2011

आज ख़्वाबों में दीदार तुम्हारा हुआ

आज ख़्वाबों में

दीदार तुम्हारा हुआ

हमें सोते से जगाया

खामोश ख्यालों में

उबाल आया

दिल की आग को

भड़काया

ख्वाइशों का

नया दौर शुरू हुआ

सुकून को भगाया

बेचैनी को न्योता दिया

अब दिन निरंतर

इंतज़ार में कटेंगे

आँखों से अश्क बहेंगे

हसरतें पूरी हो जाएँ

दिन रात दुआ करेंगे

मर मर कर जियेंगे

मोहब्बत के

सारे रंग देखेंगे

तुम्हारी सूरत ने

दिल को लुभाया

तुम्हें पाने के लिए

सब खुशी से सहेंगे

जाँ भी देनी पड़े

हंस के दे देंगे

26-07-2011

1239-119-07-11

Wednesday, July 20, 2011

रोकर जियो या हंस कर जियो

रात बीती
ख़्वाबों की लड़ी टूटी
ख्यालों की बातें
दफ़न हो गयी
दर्द सारे दब गए
क्या आज करना है ?
याद रहा
जीने के लिए
पेट की आग को
बुझाना है
रोकर जियो या
हंस कर जियो
जब तक जान हैं
मजबूरी  है
जीने के लिए
सब कुछ भूलना है
निरंतर काम तो
करना है
20-07-2011
1210-90-07-11

Sunday, July 17, 2011

हर लफ्ज तेरी यादों में ढला

हर लफ्ज
तेरी यादों में ढला
जहन तेरे
ख्यालों से भरा
हर नज़्म में होता
ज़िक्र तेरा
दिल निरंतर गम में
रोता
डगर मोहब्बत की
चुनी मैंने
सिला जो भी हो 
मंज़ूर मुझे
17-07-2011
1199-79-07-11

Monday, July 11, 2011

दिल करता

दिल करता
जहन के
दरीचे खोल दूं
उसमें 
भरा नफरत का
कचरा फैंक दूं
झाड पोंछ कर
साफ़ करूँ
नए ख्यालों से 
सजाऊँ
मोहब्बत के 
फूलों से भर दूं
निरंतर लोगों को
गले से लगाऊँ
दुआओं से नवाजूं
हंसू और हंसाऊं
हर दिन दीपावली
ईद मनाऊँ
11-07-2011
1165-49-07-11
(दरीचे =खिड़कियाँ,नवाजूं =भेंट देना,अनुग्रह,सहायता )

Wednesday, June 29, 2011

कल हकीकत थे,आज याद बन गए

कल हकीकत थे
आज याद बन गए
दिल के टुकड़े टुकड़े
हो गए
कल तक आँखों में
खुमार था
आज रो रो कर लाल हैं
कल और आज के
दरम्यान
क्या से क्या हो गया ?
हंसता हुआ चेहरा
मुरझा गया
ख्यालों में रहना बंद
हुआ
निरंतर इंतज़ार अब
ख़त्म हुआ
उनसे मिलना अब
ख़्वाबों में रह गया
29-06-2011
1113-140-06-11