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Sunday, February 5, 2012

यादें



वही नज़ारा
वही मौसम
वही नदी का किनारा
किनारे पर लगे
पेड़ों की झुकी डालियाँ
कल कल बहते
पानी को चूम रही है
वो अब साथ नहीं
पर उसकी खुशबू 
हवाओं में बाकी है
मछलियाँ अब भी
पानी से उचक कर
उसके तबस्सुम की
मुन्तजिर हैं
उसके दीदार को
तरसती हैं
05-02-2012
107-17-02-12
दीदार=देखना
मुन्तजिर=उम्मीद में इंतज़ार करना
तबस्सुम – मुस्कुराहट

Tuesday, July 26, 2011

आज ख़्वाबों में दीदार तुम्हारा हुआ

आज ख़्वाबों में

दीदार तुम्हारा हुआ

हमें सोते से जगाया

खामोश ख्यालों में

उबाल आया

दिल की आग को

भड़काया

ख्वाइशों का

नया दौर शुरू हुआ

सुकून को भगाया

बेचैनी को न्योता दिया

अब दिन निरंतर

इंतज़ार में कटेंगे

आँखों से अश्क बहेंगे

हसरतें पूरी हो जाएँ

दिन रात दुआ करेंगे

मर मर कर जियेंगे

मोहब्बत के

सारे रंग देखेंगे

तुम्हारी सूरत ने

दिल को लुभाया

तुम्हें पाने के लिए

सब खुशी से सहेंगे

जाँ भी देनी पड़े

हंस के दे देंगे

26-07-2011

1239-119-07-11

उन्हें देखना क़यामत ढा गया

उन्हें देखना

क़यामत ढा गया

इश्क अब रोजगार

बन गया

सुबह-ओ-शाम का

काम हो गया

भूख ख़त्म हो गयी

उनका दीदार प्यास

हो गयी

जीना दुश्वार हो गया

उन्हें पाना अब मकसद

हो गया

निरंतर इंतज़ार आदत

बन गया

जूनून की हद तक

इश्क सर पर सवार

हो गया

26-07-2011

1237-117-07-11

Wednesday, April 6, 2011

मैं भी इंतज़ार में था,वो भी इंतज़ार में थे

 
सुबह से शाम
इंतज़ार करता रहा
खिड़की से
सड़क को देखता रहा
आँखों से 
अश्क बहाता रहा
उनका आना ना हुआ
शाम हो गयी
आँखें भी लाल हुयी
उम्मीद
फिर भी कम ना हुयी
अब तक  
उनका दीदार ना हुआ
रात भी आ गयी,
रोना कम ना हुआ
ना वो आये
 ना पैगाम आया
हिम्मत टूट गयी,
आँख भी लग गयी
सुबह उठा दरवाज़ा खोला
वो बाहर लेटे थे,
हाथ पैर ठन्डे थे
गौर से देखा
तो दम तोड़ चुके थे
दर तक पहुँच कर भी
ना पहुंचे थे
मैं भी इंतज़ार में था,
वो भी इंतज़ार में थे
  
06-04-2011
609-42 -04-11