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Monday, October 3, 2011

बापू तुम्हारे नाम पर कैसे नाटक हो रहे हैं

बापू तुम्हारे नाम पर 
कैसे नाटक हो रहे हैं 
जुबान वाले गूंगे हो गए  
बेजुबान बोल रहे हैं 
देश के लोग रो रहे हैं
नाम के आगे गांधी 
लगाकर 
लोग राज कर रहे हैं 
अब तुमसे भी बड़े 
हो गए हैं 
लूट घोटाले आम हो गए
सफ़ेद कपड़ों में चोर 
घुस गए
गरीब निरंतर गरीब 
हो रहे हैं  
रक्षक भक्षक बन गए हैं 
धर्म,ईमान पीछे रह गए 
सीख तुम्हारी भूल गए 
चोर साहूकार एक 
हो गए हैं
बापू तुम्हारे नाम पर 
कैसे नाटक हो रहे हैं ?
02-10-2011
1596-05-10-11 

Tuesday, August 16, 2011

कैसा प्रजातंत्र है ?

कैसा प्रजातंत्र है ?

जहाँ नेता भ्रष्ट हैं

अपने में मस्त हैं

प्रजा त्रस्त हैं

चिंताओं से ग्रस्त हैं

भ्रष्टाचार से पस्त है

ना विरोध कर सकूँ

ना खुल कर रो सकूँ

निरंतर

ज़ुल्म सहता रहूँ

मर मर कर जीता रहूँ

खुद से पूछता हूँ

कब तक चुप रहूँ ?

गांधी के देश में

घुट घुट कर जीता रहूँ

आत्म सम्मान की

बली देता रहूँ

या उठ खडा हो जाऊँ

ज़ुल्म का बदला लूँ

व्यवस्था बदलने की

लड़ायी में अपनी

आहुती दूँ

16-08-2011

1365-87-08-11

Thursday, April 7, 2011

एक और गांधी आया,लोगों को घर से बाहर लाया

एक और गांधी आया
लोगों को घर से
बाहर लाया
देश में जलजला आया
त्रस्त जनता का गुबार
बाहर आया
भ्रष्ट नेताओं को पसीना आया
खेल बरगलाने का चालू है
सांप मर जाए लाठी
ना टूटे का खेल जारी है
बूढ़े,युवा,बच्चे सड़कों पर निकले
भ्रष्टाचार मिटाने के प्रण से
आन्दोलन में जुटे
कफ़न सर पर बांध
अन्ना भूख हड़ताल पर बैठे
मांगों को मानना होगा
भ्रष्टाचारियों को जेल जाना होगा
निरंतर तड़प रही
जनता के सामने
सरकार को झुकना होगा
भारत को
भ्रष्टाचार मुक्त करना होगा
अन्ना हजारे का सपना
पूरा होगा
07-04-2011
625-58 -04-11