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Tuesday, August 16, 2011

कैसा प्रजातंत्र है ?

कैसा प्रजातंत्र है ?

जहाँ नेता भ्रष्ट हैं

अपने में मस्त हैं

प्रजा त्रस्त हैं

चिंताओं से ग्रस्त हैं

भ्रष्टाचार से पस्त है

ना विरोध कर सकूँ

ना खुल कर रो सकूँ

निरंतर

ज़ुल्म सहता रहूँ

मर मर कर जीता रहूँ

खुद से पूछता हूँ

कब तक चुप रहूँ ?

गांधी के देश में

घुट घुट कर जीता रहूँ

आत्म सम्मान की

बली देता रहूँ

या उठ खडा हो जाऊँ

ज़ुल्म का बदला लूँ

व्यवस्था बदलने की

लड़ायी में अपनी

आहुती दूँ

16-08-2011

1365-87-08-11

Thursday, July 14, 2011

आज फिर याद ताज़ा हुयी ,ज़ुल्म की कहानी याद आयी

दिल-ओ-दिमाग में
झुरझुरी छायी
हर बात पुरानी 
याद आयी
कब और कहाँ ?
पहली बार दिखी थी
वो तारीख वो जगह
याद आयी
क्या उसने कहा ?
क्या मैंने कहा ?
हर बात याद आयी
दिल-ओ-जान एक
होते गए
निरंतर वादे पर वादे
करते रहे
मोहब्बत में खो गए
कैसे सपने टूटे ?
कैसे वो रूठ गए ?
हम रोते रह गए
ग़मों का बोझ सहते रहे
हर लम्हा उन्हें याद
करते रहे
आज फिर याद
ताज़ा हुयी
ज़ुल्म की कहानी
  याद आयी

14-07-2011
1184-67-07-11