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Sunday, March 18, 2012

अब लोग रोने भी नहीं देते

अब
लोग रोने भी नहीं देते
आंसूओं को खून का
घूँट सा पीने को कहते
डरते हैं
कहीं ज़माने ने बहते
आंसूओं को देख लिया
तो देखने वाले सवाल
पूछेंगे
कहीं मुंह से उनका नाम
निकल गया
तो उन्हें जान लेंगे
घबरा कर ग़मों को
चुपचाप सहने के लिए
कहते  
18-03-2012
400-134-03-12

Thursday, September 22, 2011

टूटे हुए मंज़र

दिन भर निरंतर
उनके इंतज़ार में
डूबे रहते
आँखों में हसरत के
टूटे हुए मंज़र होते
शाम तक बुझे हुए
चिराग सा दिखते
ग़मों के बोझ
सोने भी ना देते
रात भर सुबह का
इंतज़ार करते
ज़िन्दगी
निरंतर यूँ ही
तमाम करते
22-09-2011
1542-113-09-11

Sunday, July 17, 2011

इक आवाज़ ने मुझे जगाया ,सुकून का फलसफा समझाया

दिल दर्द से रो
रहा था
ग़मों का सैलाब
आया था
इक आवाज़ ने मुझे
जगाया
सुकून का फलसफा
समझाया
परेशान ना हो
"मैं"को छोडो
"मैं"दर्द बढाता
क्या किसी ने कहा ?
क्या किसी ने करा?
जहन से निकालो
करने वाले करते रहेंगे
निरंतर 
आगे बढना तो
खुद पर काबू रखो
आसान नहीं सब
करना
ये भी जान लो
लाख चलन लोग
अपना भूलें
तुम अपना चलन
ना भूलो
खून का घूँट पी लो
सफलता और सुकून
लिखवा कर ले लो
17-07-2011
1195-75-07-11

Thursday, July 14, 2011

आज फिर याद ताज़ा हुयी ,ज़ुल्म की कहानी याद आयी

दिल-ओ-दिमाग में
झुरझुरी छायी
हर बात पुरानी 
याद आयी
कब और कहाँ ?
पहली बार दिखी थी
वो तारीख वो जगह
याद आयी
क्या उसने कहा ?
क्या मैंने कहा ?
हर बात याद आयी
दिल-ओ-जान एक
होते गए
निरंतर वादे पर वादे
करते रहे
मोहब्बत में खो गए
कैसे सपने टूटे ?
कैसे वो रूठ गए ?
हम रोते रह गए
ग़मों का बोझ सहते रहे
हर लम्हा उन्हें याद
करते रहे
आज फिर याद
ताज़ा हुयी
ज़ुल्म की कहानी
  याद आयी

14-07-2011
1184-67-07-11
 

Friday, June 10, 2011

पानी के किनारे भी प्यासे रह गए

करीब आ कर भी
दूर हो गए
पानी के किनारे भी
प्यासे रह गए
अरमान अरमान ही  रहे
कसूर उनका नहीं
हम ही किस्मत से
कमज़ोर निकले
वफ़ा का मतलब
उन्हें  समझा ना सके
ग़मों का बोझ खुद
बढ़ा गए
निरंतर  अकेले थे
अकेले रह गए
10-06-2011
1024-51-06-11