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Tuesday, October 23, 2012

अब रोज़ की ज़द्दोज़हद से थक गए हैं



अब रोज़ की
ज़द्दोज़हद से
थक गए हैं
 अब कुछ ऐसा
करना चाहते हैं
जो मन को भाये
दिल को सुहाए
किसी का दिल ना
दुखाये
हम भी आराम
से जियें
वो भी आराम
से जियें
दोनों खुश रहे
780-23-24-10-2012
ज़द्दोज़हद,दिल को सुहाए,मन को भाये 

Wednesday, February 1, 2012

बड़ी अजीब रात थी

इक तरफ चाँद की ठंडक
दूसरी तरफ
उसके हुस्न की गर्मी
इक तरफ मेरी ख्वाईशें
दूसरी तरफ उसकी
 ना नुकर
रात यूँ ही बीत रही थी
ठंडी हवा भी कह रही थी
क्यों आगे न बढ़ रहे हो
कब तक शरमाओगे तुम
इसी ज़द्दोज़हद में रात
गुजर गयी
हसरतें अधूरी रह गयीं
ना वो खुश हुए
ना हम
01-02-2012
92-02-02-12

Tuesday, August 2, 2011

वो यादों में सिमटी रह जाती

दिन भर की

ज़द्दोज़हद के बाद

रात में थक मांद कर

सोने की कोशिश करता

उसका नाम याद

आ जाता

यादों का सिलसिला

शुरू होता

तकिये पर सर कभी दाएँ

कभी बायें पलटता

करवटें बदलता रहता

निरंतर उसे

याद करना भी ज़रूरी

नींद को भी पता

वो भी साथ नहीं देती

किसी तरह रात कटती

भोर होते ही शोर से

नींद से भरी आँखें खुलती

रोज़ की ज़द्दोज़हद

शुरू हो जाती

वो यादों में सिमटी

रह जाती

02-08-2011

1288-10-08-11