Showing posts with label तस्वीर. Show all posts
Showing posts with label तस्वीर. Show all posts

Saturday, December 3, 2011

एक फोटो फ्रेम के मुख से


कमरे के कौने में ,
मेज पर पड़े चांदी के
रत्न जडित फोटो फ्रेम
पर दृष्टी पडी
जिसमें  मेरे पर दादा की
तस्वीर लगी हुयी थी
तो मुझे से रहा ना गया
उसे हाथ मैं उठा कर
देखने लगा
ऐसा प्रतीत हुआ मानों
कह रहा हो
मैं सामान्य फोटो फ्रेम
नहीं हूँ
कई दशकों से इस कमरे में
होने वाले
हर कार्य कलाप का गवाह हूँ
चंचल बचपन ,
जोश से भरी
जवानी और थके हुए
झुर्रियां लिए बूढ़े चेहरों की
तसवीरें मैंने ह्रदय से
लगा कर रखी हैं
जो संसार से चले गए
उन्हें भी प्रेम से संजोया है
मेरा स्थान बदलता रहा ,
पर कमरा नहीं बदला
मैंने खामोशी से घर के
लोगों को
बचपन से बुढापे तक
संसार में आते जाते देखा
घर में किसी ने जन्म लिया
या फिर कोई सदा के लिए
चला गया
मुझे भी भरपूर खुशी और
दुःख हुआ
घर के लोगों को हँसते ,
रोते देखा
लड़ते झगड़ते देखा
प्यार मोहब्बत में जीते देखा
जीवन के हर रंग को
समीप से देखा
पता नहीं कब तक देखना है
जब तक
घर में सम्पन्नता है
मुझे पूरी आशा है
कोई मुझे कुछ रूपये
के लिए
अपने से दूर नहीं करेगा
मैं हँस बोल
नहीं सकता तो क्या ? 
इस घर को अपना
मानता हूँ
सदा घर की समृद्धी के लिए
परमात्मा से निरंतर प्रार्थना
करता हूँ
किसी और जगह जा कर
मुझे खुशी नहीं मिलेगी
उसकी ह्रदय से
निकली प्यार भरी
बातों ने
मुझे भाव विहल कर दिया
फोटो फ्रेम को मैंने
सीने से लगा दिया
03-12-2011
1838-06-12

Friday, October 28, 2011

छुप ना पाओगे


लाख छुपने की 
कोशिश करो
हम से छुप ना पाओगे
परदे के पीछे से भी
नज़र हम को आओगे
तस्वीर
तुम्हारी आँखों से
दिल में उतारी
कैसे हम से बच पाओगे?
निरंतर
ख़्वाबों,ख्यालों में
रहते हो
कैसे हम से पीछा
छुडाओगे
जितना दूर जाओगे
हमें उतना पास
पाओगे
लाख छुपने की
कोशिश करो
हम से छुप ना पाओगे
26-10-2011
1713-120-10-11

Sunday, August 28, 2011

कैसे कह सकते हो तुम ?

कोई रिश्ता नहीं
कैसे कह सकते हो तुम ?
ये बात ज़रूर है
की तुम मुझे जानते नहीं
मुझे पहचानते नहीं
मुझ से कभी मिले नहीं
सिर्फ तस्वीर देखी
तुमने मेरी
इतना ज़रूर जानता हूँ
मैं तुम्हारा
तुम मेरा इंतज़ार
करते हो
मिलने की ख्वाइश
रखते हो
कुछ आपस में बाँट लें
ये हसरत  दिल में
रखते हो
28-08-2011
1409-131-08-11

Saturday, August 27, 2011

खवाबों में मिलता रहूँगा

जो तुम्हें देखने की
दुआ ना करे
जहन में तस्वीर
जिसकी बसायी
उस से मिलने की
ख्वाइश ना रखे 
सिर्फ तस्वीर देखी
तुम्हारी
रूबरू ना देखूं
ये अब मुमकिन नहीं
मिलने की कोशिश
निरंतर जारी रहेगी
रज़ा तुम्हारी चाहिए
ना मिलेगी जब तक
खवाबों में मिलता
रहूँगा
दुआ खुदा से करता
रहूँगा