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Wednesday, November 28, 2012

झूठी तारीफ़ से बचने लगोगे



तुमने
मेरी पीठ थपथपाई
बदले में मैंने तुम्हारी
पीठ नहीं थपथपाई
तुम्हारी आशाओं पर
तुषारापात हो गया
तुम रुष्ट हो गए
पहले मुझे सोना समझते थे
अब कोयला कहने लगे
अब तुम्ही बताओ
कैसे कोयले को सोना कहूं
कह भी दूंगा
तो तुम्हें झूठे दंभ से
भर दूंगा
तुम सोना बनने की जगह
कोयला ही बने रहोगे
आज मुझसे नाखुश
हो भी जाओ
तो भी तुम्हारा अहित
नहीं कर सकता
पर एक दिन मेरी बात को
समझ जाओगे
खुद झूठी तारीफ़ से
बचने लगोगे
877-61-28-11-2012
झूठी तारीफ़,तारीफ़, नाखुश

Friday, October 5, 2012

तारीफ़ का जवाब तारीफ़ से देते हैं हम



तारीफ़ का जवाब
तारीफ़ से देते हैं हम
सच्ची बात
नहीं कहते हैं हम
रस्म-ओ-रिवाज़
निभाते हैं हम
बुरा नहीं मान जाए
सामने वाला
इसलिए जवाब में
तारीफ़ करते हैं हम
डरते हैं
अगर नहीं करी
तारीफ़ हमने भी
नहीं मिलेगी
तारीफ़ हमें भी
761-06-05-10-2012
तारीफ़

Sunday, May 6, 2012

मैं इतना जाहिल तो नहीं


मैं इतना जाहिल तो नहीं
ख़ूबसूरती को नहीं
पहचानूँ
तुम्हें देख कर आहें
ना भरूँ
इतना तंगदिल भी नहीं
तुम मुस्कराओं
मैं तारीफ़ ना करूँ
इतना खुदगर्ज़ भी नहीं
तुम जवाब ना दो
मैं बुरा मान लूँ
अब तुम्ही बताओ
गर दिल लगाया तुमसे
तो क्या गुनाह किया
या तो तुम खुद को
खूबसूरत नहीं मानती
या फिर तुम्हारी
मुस्काराहट
इस लायक नहीं
कोई उसकी तारीफ़ करें
06-05-2012
502-17-05-12