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Sunday, September 23, 2012

जब सूरज पहाड़ों के पीछे से झाँकने लगता है



जब सूरज पहाड़ों के
पीछे से झाँकने लगता है
लगता जैसे
उसका चमकता चेहरा
नज़र आ रहा है
वो भी इतनी दूर मुझसे
जितना आसमान में
सूरज मुझसे
मुझे अपनी ख़ूबसूरती की
रोशनी से
सरोबार तो करती
पर कभी
अपनी ख़ूबसूरती को
करीब से नहीं देखने देती
748-44-23-09-2012

Monday, August 13, 2012

मंजिल



सोलह की उम्र थी
हवा में दुपट्टा
बेहिसाब उड़ रहा था
जुल्फें बेख़ौफ़ लहरा रही थी
आँखों में अजीब सी
कशिश थी
गीत गुनगुनाते हुए
मदमाती चाल से
बेफिक्र चली जा रही थी
नज़र पडी तो दिल में
बिजली सी कोंधी
एक झपट्टे में दिल
ले गयी
यूँ लगा हुस्न परी
आसमां से ज़मीं पर
उतर आयी
पता नहीं था
अब तक जिस दिल को
कहाँ मंजिल
कहाँ ठिकाना उसका
आज तलाश पूरी हुयी
पता चल गया
कहाँ मंजिल उसकी
13-08-2012
659-19-08-12

Sunday, May 6, 2012

मैं इतना जाहिल तो नहीं


मैं इतना जाहिल तो नहीं
ख़ूबसूरती को नहीं
पहचानूँ
तुम्हें देख कर आहें
ना भरूँ
इतना तंगदिल भी नहीं
तुम मुस्कराओं
मैं तारीफ़ ना करूँ
इतना खुदगर्ज़ भी नहीं
तुम जवाब ना दो
मैं बुरा मान लूँ
अब तुम्ही बताओ
गर दिल लगाया तुमसे
तो क्या गुनाह किया
या तो तुम खुद को
खूबसूरत नहीं मानती
या फिर तुम्हारी
मुस्काराहट
इस लायक नहीं
कोई उसकी तारीफ़ करें
06-05-2012
502-17-05-12

Tuesday, January 10, 2012

उनकी ख़ूबसूरती में

वो ख्यालों में डूबी हुयी
सुनहरी धूप में
गीले बाल सुखा रही थी
धूप बालों से कुछ
इस तरह
छन कर आ रही थी
मानों लुका छुपी खेल
रही हो
साथ ही कह रही हो
मेरा रास्ता मत रोको
घने लम्बे नर्म काले
बालों को
पूरी तरह से नहलाने दो
उनकी ख़ूबसूरती में
सरोबार होने दो
10-01-2012
27-27-01-12