भाग्यवान हूँ
इश्वर बहुत कृपालु
मुझ पर
ढेर सारे मित्र मेरे
साथ हँसते साथ गाते
सुख दुःख में साथ
निभाते
एक आवाज़ पर दौड़े
चले आते
फिर भी कुछ खालीपन
लगता
निरंतर मन मष्तिष्क को
उद्वेलित करता
कानों में सदा
अधूरेपन का स्वर
गूंजता
ह्रदय में सूनापन
अखरता
कुछ और चाहिए
मुझको ?
ढूंढ रहा हूँ उसको
जो सत्य से अवगत
करा दे
कुंठाओं को विराम दे दे
मन को चैन ,
ह्रदय को तृप्ति दे दे
29-09-2011
1585-156-,09-11
ना जान पहचान थी
ना मुलाक़ात थी
फिर भी कल रात
उनसे गुफ्तगू हो गयी
ज़िन्दगी में
नयी शुरुआत हुयी
उनका अचानक
मिलना
नियामत हो गयी
हँस, हँस कर
उनसे बात हुयी
कुछ मन की
कुछ दिल की
सांझा हुयी
निरंतर ठहरी हुयी
ज़िन्दगी में हलचल
हुयी
दिल को खुशी
मन को तृप्ति हुयी
कल रात उनसे
गुफ्तगू हो गयी 16-09-2011
1513-84-09-11
वो सबसे दुखी जो
निरंतर समझता
खुद को दुखी
जो खुदा ने दिया
उस से तृप्ति नहीं होती
जुबान से सदा खीज
प्रकट होती
संतुष्टि उस से कोसों
दूर रहती
ज़िन्दगी रोते रोते
कटती
17-07-2011
1198-78-07-11