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Thursday, September 29, 2011

कुछ और चाहिए

भाग्यवान हूँ
इश्वर बहुत कृपालु
मुझ पर
ढेर सारे  मित्र मेरे
साथ हँसते साथ गाते
सुख दुःख में साथ
निभाते
एक आवाज़ पर दौड़े
चले आते
फिर भी कुछ खालीपन
लगता
निरंतर मन मष्तिष्क को
उद्वेलित करता
कानों में सदा
अधूरेपन का स्वर
गूंजता
ह्रदय में सूनापन
अखरता
कुछ और चाहिए
मुझको ?
ढूंढ रहा हूँ उसको
जो सत्य से अवगत
करा दे
कुंठाओं को विराम दे दे
मन को चैन ,
      ह्रदय को तृप्ति दे दे       
29-09-2011
1585-156-,09-11

Friday, September 16, 2011

कल रात उनसे गुफ्तगू हो गयी

ना जान पहचान थी
ना मुलाक़ात थी
फिर भी कल रात
उनसे गुफ्तगू हो गयी
ज़िन्दगी में
नयी शुरुआत हुयी
उनका अचानक
मिलना
नियामत हो गयी
हँस, हँस कर
उनसे बात हुयी
कुछ मन की
कुछ दिल की
सांझा हुयी
निरंतर ठहरी हुयी
ज़िन्दगी में हलचल
हुयी
दिल को खुशी
मन को तृप्ति हुयी
कल रात उनसे
   गुफ्तगू हो गयी  
16-09-2011
1513-84-09-11

Sunday, July 17, 2011

दुखी


वो सबसे दुखी जो

निरंतर समझता

खुद को दुखी

जो खुदा ने दिया

उस से तृप्ति  नहीं होती

जुबान से सदा खीज

प्रकट होती

संतुष्टि उस से कोसों

दूर रहती

ज़िन्दगी रोते रोते

कटती

17-07-2011
1198-78-07-11