Showing posts with label तड़प. Show all posts
Showing posts with label तड़प. Show all posts

Monday, September 19, 2011

चोट लगी दिल पर

चोट लगी दिल पर
लोग चारागर को
बुला रहे
दिल दर्द से तड़प रहा
लोग आँखों से आंसूं
पोंछ रहे
वो रुस्वां हो गए
लोग कहीं और दिल
लगाने की सलाह दे रहे
निरंतर भूल रहे
दर्द-ऐ-दिल की दवा भी
दिल के चारागर
साथ ले गए
(चारागर=चिकित्सक,डाक्टर)
20-09-2011
1528-99-09-11

Friday, September 9, 2011

दिल की तड़प आँखों की प्यास कभी पूरी नहीं होती

दिन  भर के
काम की परिणिति
थकान में होती
रात होते ही आँखें
नींद से बोझिल
होने लगती
बिस्तर पर लेटते ही
बंद हो जाती  
नींद की गोद में
समा जाती 
आहट भी ना होती
वो चली आती
नींद उड़ जाती
आँखें खुल जाती 
मुस्काराते हुए
वो लौट जाती
रात भर आँखें
खुली रहती 
ना वो ना नींद
फिर लौट कर आती
वो निरंतर
ऐसा ही करती
सपनों की दुनिया को
उजाडती
नींद पूरी नहीं होती  
दिल की तड़प
आँखों की प्यास
कभी पूरी नहीं होती 
09-09-2011
1473-45--09-11

Sunday, August 7, 2011

अब चुप ना रहो ,कुछ तो कहो

अब चुप ना रहो

कुछ तो कहो

हमें पता दिल तुम्हारा

तड़प रहा

मन बात करने को

कह रहा

निरंतर इंतज़ार ना करो

मन की सुनो

तड़प दिल की दूर करो

कह ना सको तो

इशारा ही कर दो

हम समझ जायेंगे

फासले खुद-बी-खुद

मिट जायेंगे

दूर होकर भी पास

आ जायेंगे

07-08-2011

1312-34-08-11