निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
Saturday, March 17, 2012
अब कैसे उनसे आस लगाएँ
Thursday, March 15, 2012
उठ ही जाती हैं निगाहें उनकी तरफ
Monday, September 19, 2011
चोट लगी दिल पर
Monday, August 1, 2011
दिल लगाना बुरा नहीं ,दिल जलाना क़यामत है
खुद को भूल गए
सुबह-ओ-शाम सिर्फ
उनको ढूंढते रहे
दाने दाने को
मोहताज़ हो गए
वो बड़े बेवफा निकले
बेरुखी से रुस्वां हो गए
खाने को गम
पीने को आंसू रह गए
निरंतर रोते रोते
एक बात समझ गए
दिल लगाना बुरा नहीं
दिल जलाना क़यामत है
मोहब्बत के खेल में
कुछ भी मुमकिन है
01-08-2011
1284-06-08-11
Sunday, July 31, 2011
वो रुस्वां क्या हुयी, हर शख्श को खबर हो गयी
वो रुस्वां क्या हुयी
हर शख्श को खबर
हो गयी
शहर में चर्चा-ऐ-आम
हो गयी
कई आँखों की चमक
बढ़ गयी
मनचलों की हसरतें
जाग गयी
हर नज़र खामोशी से
वजह पूछ रही थी
कैसे बताता वो हमें
चाहती ही नहीं थी
वो तो सिर्फ
वक़्त गुजार रही थी
शौक -ऐ-मोहब्बत पूरा
कर रही थी
31-07-2011
1277-161-07-11
Sunday, July 24, 2011
बहुत मुद्दत के बाद उन्होंने याद किया
मुद्दत के बाद
उन्होंने याद किया
जरिये ख़त
हाल-ऐ-दिल सुनाया
क्यों रुस्वां हुए ?
मुझे वाकिफ कराया
अब फिर अकेले हैं
लौट कर आना चाहते
दिल से दिल मिलाना
चाहते
जो हुआ वो भुलाना
चाहते
उन्हें कैसे बताएँ ?
निरंतर रोते रोते
हम थक गए
मजबूरी में किसी के
हो गए
वो निजात पा चुके थे
हम फंस चुके थे
24-07-2011
1223-103-07-11