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Saturday, March 17, 2012

अब कैसे उनसे आस लगाएँ


उनसे आस लगाएँ
घर के सामने से
निकल गए
हम उन्हें याद ना आए
अब चाहे मौसम
खुशगवार हो जाए
चांदनी रात आए
कैसे उनको को याद करें
जो खामोशी से जुदा
हो गए
बिना वजह रुस्वां
हो गए
कैसे सदा दे कर उन्हें
बुलाएं
17-03-2012
387-121-03-12

Thursday, March 15, 2012

उठ ही जाती हैं निगाहें उनकी तरफ

उठ ही जाती हैं
निगाहें
उनके चेहरे की तरफ
मिलती हैं
उनकी निगाहों से
निगाहें उम्मीद से
शायद एक दिन कह दें
बहुत रह लिए
जुदायी में
आओ अब साथ
रह लें
15-03-2012
383-117-03-12

Monday, September 19, 2011

चोट लगी दिल पर

चोट लगी दिल पर
लोग चारागर को
बुला रहे
दिल दर्द से तड़प रहा
लोग आँखों से आंसूं
पोंछ रहे
वो रुस्वां हो गए
लोग कहीं और दिल
लगाने की सलाह दे रहे
निरंतर भूल रहे
दर्द-ऐ-दिल की दवा भी
दिल के चारागर
साथ ले गए
(चारागर=चिकित्सक,डाक्टर)
20-09-2011
1528-99-09-11

Monday, August 1, 2011

दिल लगाना बुरा नहीं ,दिल जलाना क़यामत है

मोहब्बत के जूनून में

खुद को भूल गए

सुबह-ओ-शाम सिर्फ

उनको ढूंढते रहे

दाने दाने को

मोहताज़ हो गए

वो बड़े बेवफा निकले

बेरुखी से रुस्वां हो गए

खाने को गम

पीने को आंसू रह गए

निरंतर रोते रोते

एक बात समझ गए

दिल लगाना बुरा नहीं

दिल जलाना क़यामत है

मोहब्बत के खेल में

कुछ भी मुमकिन है

01-08-2011

1284-06-08-11

Sunday, July 31, 2011

वो रुस्वां क्या हुयी, हर शख्श को खबर हो गयी

वो रुस्वां क्या हुयी

हर शख्श को खबर

हो गयी

शहर में चर्चा-ऐ-आम

हो गयी

कई आँखों की चमक

बढ़ गयी

मनचलों की हसरतें

जाग गयी

हर नज़र खामोशी से

वजह पूछ रही थी

कैसे बताता वो हमें

चाहती ही नहीं थी

वो तो सिर्फ

वक़्त गुजार रही थी

शौक -ऐ-मोहब्बत पूरा

कर रही थी

31-07-2011

1277-161-07-11

Sunday, July 24, 2011

बहुत मुद्दत के बाद उन्होंने याद किया

बहुत

मुद्दत के बाद

उन्होंने याद किया

जरिये ख़त

हाल-ऐ-दिल सुनाया

क्यों रुस्वां हुए ?

मुझे वाकिफ कराया

अब फिर अकेले हैं

लौट कर आना चाहते

दिल से दिल मिलाना

चाहते

जो हुआ वो भुलाना

चाहते

उन्हें कैसे बताएँ ?

निरंतर रोते रोते

हम थक गए

मजबूरी में किसी के

हो गए

वो निजात पा चुके थे

हम फंस चुके थे

24-07-2011

1223-103-07-11