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Thursday, March 15, 2012

उठ ही जाती हैं निगाहें उनकी तरफ

उठ ही जाती हैं
निगाहें
उनके चेहरे की तरफ
मिलती हैं
उनकी निगाहों से
निगाहें उम्मीद से
शायद एक दिन कह दें
बहुत रह लिए
जुदायी में
आओ अब साथ
रह लें
15-03-2012
383-117-03-12

Wednesday, July 27, 2011

हर मौसम खिजा का मौसम ,अब बहारें कहाँ देखूं ?

तुम्हारी जुदायी में

होश खो दिया

मोहब्बत का मतलब

भूल गया

शहर में तुमसा

कोई नहीं

अब दिल किससे लगाऊँ?

नज़रें कहीं और

टिकती नहीं

अब तमन्नाएँ क्या रखूँ ?

हर मौसम निरंतर

खिजा का मौसम

अब बहारें कहाँ देखूं ?

27-07-2011

1243-123 -07-11

Saturday, July 2, 2011

रात भर सोया ना था

रात भर
सोया ना था
उसकी जुदायी के
गम में रो रहा था 
आँखों से सब
पता चल रहा था
निरंतर छुपाने की
कोशिश में
मुंह चुरा रहा था
हाल-ऐ-दिल
खुद-बी-खुद बयाँ
कर रहा था
02-07-2011
1128-12-07-11