Tuesday, August 21, 2012

खामोश है फिजा



खामोश है फिजा
खामोश  हैं पेड़ पत्ते
खामोश है
तालाब का पानी
सब इंतज़ार में
कब मोहब्बत की हवा
चल जाए
मौसम खुशगवार
हो जाए
हसरतों के कंकर
ठहरे पानी में
ज़लज़ला मचाये
चारों तरफ
मोहब्बत की महक
फ़ैल जाए
फिजा में रवानी
आ जाए
21-08-2012
678-38-08-12

आहें



बरसात की छोटी बूंदों के साथ
कुछ आहें भी गिरी होंगी ज़रूर

जो छोड़ गए ज़मीं से साथ हमारा
उनके आंसू भी गिरे होंगे ज़रूर

जो बस गए जा कर ज़न्नत में
हमें याद करके रोते होंगे ज़रूर
21-08-2012
677-37-08-12

रोज़ की तरह



रोज़ की तरह
आज भी बहुत
इंतज़ार के बाद भी
वो नहीं आये
वैसे भी अब
वो कहाँ आते हैं
हम तो यूँ ही
उन्हें याद करते हैं
उन्हें भुला जो नहीं
पाते  हैं
21-08-2012
676-36-08-12

हमें क्या पता था



हमें क्या पता था 
उनकी अदाओं पर 
मर मिटेंगे हम 
सुकून की ज़िन्दगी में 
उबाल लायेंगे हम 
हमने तो यूँ ही तारीफ़ 
मैं उन्हें
दिल-ऐ-ख़ास कह दिया 
उन्होंने हकीकत में 
दिल ही हमें दे दिया
हम ठहरे नामुराद इतने 
उन्हें हकीकत से
वाकिफ करा दिया 
अब ना सो पाते हैं 
ना जाग पाते हैं 
हर लम्हा उन्हें
मनाते हैं 
वो मुंह फुलाए
 बैठे हैं
21-08-2012
675-35-08-12

फ़रिश्ते घबराए हुए हैं



ज़न्नत में
फ़रिश्ते घबराए हुए हैं
ज़मीन पर
उतरने से डर रहे हैं
खुदा से
फ़रियाद कर रहे हैं
चाहे दोजख में भेज दो
पर ज़मीन पर
मत भेजो
हमें इंसान से दूर
रहने दो
21-08-2012
674-34-08-12

अहम् पर कविता -हार किसी को मंज़ूर नहीं



चार दिनों का
सब्र भी नहीं किसी को
पल पल भारी लगता
जीवन का
जब अहम् हो गया
जान से प्यारा 
क्या करना फिर
दोस्त और दोस्ती का
जो भी
रह गया होड़ में पीछे
वही हारा कहलाता
हार किसी को मंज़ूर नहीं
क्या अपना क्या पराया
प्यार मोहब्बत गए भाड़ में
हर इंसान
फिर दुश्मन लगता
21-08-2012
673-33-08-12,

बुढापे पर कविता -जब उम्र का बोझ बढ़ जाए



जब उम्र का
बोझ बढ़ जाए
लाचारी जीवन का
सच बन जाए
मजबूरी में जीना
पड़ता है
कदम कदम पर
समझौता करना
पड़ता है
बाप को बेटा बन कर
रहना पड़ता है
फिर भी हँसते हुए
दिखना होता है
बहुत खुश हूँ
कहना पड़ता है
21-08-2012
672-32-08-12,

तनहा हूँ भी तनहा नहीं भी



रोज़ दिखते हैं नए नए चेहरे
दिखते नए नए नए मंज़र भी

मिलता हूँ नए नए लोगों से
देखता हूँ नए नए नज़ारे भी

दिखते तो साए भी हैं रोज़ हमें
कभी निभाते नहीं साथ वो भी

इतनी भीड़ में भी अकेला हूँ 
तनहा हूँ भी तनहा नहीं भी
21-08-2012
671-31-08-12

जीवन का बदलता रंग



मकान जैसे 
परिवार की दीवारों का
चमकता,दमकता
सब से खूबसूरत रंग
होता था
समय के अंतराल में
नए नए कमरे बनते गए 
दिन पर दिन
मेरा रंग फीका
पड़ता गया
अपनी आभा खोता गया
रिश्तों से विश्वास
पपड़ी सा खिरता गया
अब बस इंतज़ार है
कब दीवारों का रंग
बदल दिया जाएगा
चमकता हुआ
नया रंग चढ़ा जाएगा
   नए रंग के सामने
फीका पड़ता जाऊंगा
समय के साथ
नेपथ्य में छुप जाऊंगा
21-08-2012
670-30-08-12


मुझे तो मार दोगे



मुझे तो मार दोगे
पर अपनी फितरत को
कैसे मारोगे ?
कैसे अपनी नफरत को
मारोगे?
तुम कैसे बच पाओगे ?
खुदा के उसूलों को
याद कर लो 
ना किसी हथियार की
ज़रुरत
ना ही किसी ज़हर की
नफरत से भरी तुम्हारी
फितरत ही काफी है
तुम्हें दुनिया से उठाने
के लिए
21-08-2012
669-29-08-12

हर तरीका आजमाया हमने



हर तरीका
आजमाया हमने
हमारी तरफ
गर्दन तक नहीं
घुमायी उन्होंने
आदत से मजबूर थे
हमें छिछोरा समझते रहे
शक से देखते रहे
घमंड में
नाक की सीध में
चलते रहे
उन्हें पता नहीं था
हम सड़क पर गिरे
उनके कानों के झुमके को
लौटाने की
कोशिश कर रहे थे
21-08-2012
668-28-08-12

उनकी खुशी के लिए



मुझे चाहने वाले
चाहते हैं
उनकी खुशी के लिए
अपना वजूद ही खो दूं
मैं सोचता हूँ
क्यों ना खुद को ही
नेस्तनाबूद कर दूं
मेरी मौत का इलज़ाम
खुद पर ही लगा दूं
उन्हें तकलीफों से
बरी कर दूं
21-08-2012
667-27-08-12

उसे देखते ही



उसे देखते ही
मोहब्बत के बादल
दिल में गरजने लगे
खुशी से झूम कर बरसेंगे
प्यार की नदियाँ
उफन कर बहने लगेगी
दोनों के बीच
कोई दूजा ना होगा
दो हो कर भी हम एक होंगे
दो साज़ एक सुर होंगे
बस उसकी रज़ा का
 इंतजार है
जब तक नहीं मिले
बरसात के मौसम में भी
सूखे का अहसास
होता रहेगा
21-08-2012
666-26-08-12

इतना खौफज़दा हूँ



तुम से मिलने से पहले ही
दिल पर पत्थर रख कर
यादों के ताजमहल
बना लिए मैंने
मुझे पता नहीं मिल कर
क्या सोचोगी
क्या कहोगी मुझसे
जब तुमसे पूछूंगा
अभी से बता दो
तुम्हारा इरादा क्या है
क्या तुम भी वैसे ही
ज़ज्बातों से खेलोगी ?
जैसे हर मुस्कारा कर
मिलने
वाले ने खेला अब तक
क्या करूँ?
इतना खौफज़दा हूँ
इतनी बार धोखा खाया है
यादों के सहारे जी लूंगा
पर फिर धोखा नहीं
 खाऊंगा
21-08-2012
665-25-08-12

कुछ आंसू बचा कर रखूंगा



कुछ आंसू
बचा कर रखूंगा
ज़िन्दगी के आख़िरी
लम्हे में बहाऊंगा
उन अपनों के लिए
बहुत कोशिशों के
बाद भी
जिन्हें अपनी वफ़ा का
यकीन ना दिला सका
तब तक उनका शक
दूर करने की कोशिश
करता रहूँगा
21-08-2012
664-24-08-12

जीवन की भट्टी में



जीवन की भट्टी में मन
अब तेज़ आंच
पर चढी कढाई सा
हो गया है
विचार इस हद तक
उबलने लगे हैं
सब्र का पानी उफन रहा है
सब कुछ अस्त व्यस्त
करने के कगार पर
बेताबी से खडा है
इतनी उथल पुथल अब
ह्रदय से सही नहीं जाती
जिधर भी दृष्टि उठाता हूँ
सिवाय तनाव के
कुछ नज़र नहीं आता
ठहाके लगाते लोग,
बाहों में बाहें डाले दोस्त
अब गिद्ध जैसे
लुप्त होते जा रहे
इर्ष्या-द्वेष ,होड़ का राक्षस
अट्टाहास कर रहा
शोर भरे जीवन में
लगने लगा है
अपने पराये में कोई
फर्क नहीं रहा
कोई किसी को सुनना
समझना नहीं चाहता
अपनी अपनी तूतीं
बजाना चाहता
निरंतर स्वार्थ में जीता
अहम् को
सफल जीवन का सूत्र
समझता
21-08-2012
663-23-08-12

इमानदारी बकवास है



इमानदारी बकवास है
पैसा,सत्ता, ताकत ही
सब कुछ है
लूट खसोट करना
भ्रष्ट होना सबसे उत्तम  है
ना यह सत्य है
ना भावनाओं का
उबाल
ना मस्तिष्क की उपज
ना ही ह्रदय की आवाज़
ये केवल
मेरी आँखों ने जो देखा
मेरे कानों ने जो सुना
मेरे शहर में
फुटपाथ पर लेटे
भूख से मर रहे
एक गरीब असहाय ने
आंसू बहाते हुए
जो कहा उसका
वर्णन है
21-08-2012
662-22-08-12

Monday, August 13, 2012

कभी कभी मुस्करा भी लिया करो



यूँ चुप रह कर
दर्द सहना ठीक नहीं
कुछ तो कहा करो
किसी और से नहीं तो
खुद से ही
बात कर लिया करो
माना यादें
परेशान करती हैं तुम्हें
उन्हें भूल जाया करो
यूँ हँसी चेहरे पर
गम ना लाया करो
कभी कभी मुस्करा भी
लिया करो
13-08-2012
661-21-08-12

वो मेरे साथ जो नहीं होंगी



इस बार भी बारिश में
पानी तो बरसेगा
पर बरखा की फुवारों में
भीगने का
मन नहीं करेगा
पेड़ों के पत्ते भी धुल कर
चमकने लगेंगे
पर मेरे चेहरे से
उदासी के बादल
नहीं छटेंगे
मिट्टी की सौंधी
खुशबू भी आयेगी
मेरे मन की उदासी
नहीं जायेगी
इस बार की बारिश में
वो मेरे साथ जो
नहीं होंगी
13-08-2012
660-20-08-12

मंजिल



सोलह की उम्र थी
हवा में दुपट्टा
बेहिसाब उड़ रहा था
जुल्फें बेख़ौफ़ लहरा रही थी
आँखों में अजीब सी
कशिश थी
गीत गुनगुनाते हुए
मदमाती चाल से
बेफिक्र चली जा रही थी
नज़र पडी तो दिल में
बिजली सी कोंधी
एक झपट्टे में दिल
ले गयी
यूँ लगा हुस्न परी
आसमां से ज़मीं पर
उतर आयी
पता नहीं था
अब तक जिस दिल को
कहाँ मंजिल
कहाँ ठिकाना उसका
आज तलाश पूरी हुयी
पता चल गया
कहाँ मंजिल उसकी
13-08-2012
659-19-08-12