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Wednesday, November 28, 2012

इच्छाओं आकांशाओं और यथार्थ के पुल



मेरी
इच्छाओं और यथार्थ के
बीच के सभी पुल ढहते
जा रहे हैं
जैसे किसी फलदार
पेड़ से कच्चे फल
बिन पके ही गिरते
जा रहे हैं
मेरी आकांशाओं के
आसमान धूल धूसरित
होते जा रहे हैं
अब सोचने लगा हूँ
इच्छाओं आकांशाओं के
समुद्र से निकल जाऊं
यथार्थ के रेगिस्तान में
चैन ढूंढ लूं
परमात्मा की हाथों में
स्वयं को सौंप दूं
केवल कर्म में
विश्वास रखूँ
867-51-28-11-2012
आकांशाओं,इच्छाओं,यथार्थ,कर्म

Wednesday, August 3, 2011

सुन्दरता की प्रतिमूर्ती हो तुम

सुन्दरता की

प्रतिमूर्ती हो तुम

नेत्रों के लिए

सुखद अनुभूती हो तुम

सुध बुध भुला दे

ऐसी सुगंध हो तुम

मनमोहक वाध्य का

सुर हो तुम

कर्णप्रिय संगीत हो तुम

अप्सरा सी

प्रतीत होती हो तुम

इश्वर की

अद्भुत कृति हो तुम

सहजता की

अनुकृति हो तुम

निश्छलता का सागर

हो तुम

सरलता की मूरत

हो तुम

निश्चल सत्य हो तुम

हर मन को भाए

आशा जगाए

ऐसी तृष्णा हो तुम

कल्पना की पराकाष्ठा

हो तुम

निरंतर स्वप्न लोक में

विचरण कराए

स्वयं को भुला दे

ऐसा स्वप्न हो तुम

मेरे प्राणों से बढ़ कर

हो तुम

इच्छाओं का अंत

हो तुम

मेरे लिए सब कुछ

हो तुम

03-08-2011

1298-20-08-11

Friday, April 1, 2011

दर्द के साथ जीना सीख लो,दर्द कम हो जाएगा



 दर्द के साथ
जीना सीख लो
दर्द कम हो जाएगा
मोहब्बत से रहना
सीख लो
नफरत से नाता टूट
जाएगा
इच्छाओं पर
 नियंत्रण करो  
मन संतुष्ट हो
जाएगा
कर्म करना प्राम्भ
करो
सफलता का
मुख दिख जाएगा
निरंतर विश्वाश
खुद पर रखो
जीवन रंगों से भर
जाएगा
01-04--11
575—08-04-11