Showing posts with label कद्र. Show all posts
Showing posts with label कद्र. Show all posts

Saturday, August 20, 2011

आज कल दिल वालों की कद्र कौन करता ?

निरंतर फ़ोन करते थे
घंटों बात करते थे
कई पन्नों के ख़त
लिखते थे
हर ख्याल साँझा
करते थे
हर दर्द बांटते थे
अब ख़त आने बंद
हो गए
मैं फ़ोन करता हूँ
किस्मत अच्छी हो
तो उठाते हैं
कैसे हो ?
क्षमा करना अभी
व्यस्त हूँ
बाद में बात करेंगे
कह कर टालते हैं
सुना है आज कल
किसी पैसे वाले के
साथ देखे जाते हैं
मुझे बुरा नहीं लगता
जानता हूँ
मुफलिसों का
साथ कौन देता ?
आज कल
दिल वालों की कद्र
कौन करता ?
20-08-2011
1386-108-08-11

Saturday, July 9, 2011

ज़िन्दगी एक शीशा है


क्यों भूल जाते हैं सब 
ज़िन्दगी एक शीशा है
कभी भी टूट सकता
अक्स दिखना कभी भी
बंद हो सकता
जब तक दिखता
कोई कद्र नहीं करता
ना कोई झाड़ता
ना कोई पौंछता
वक़्त से बेखबर
 निरंतर अक्स देखता
रहता
09-07-2011
1159-43-07-11

Saturday, March 26, 2011

किस्मत वालों को,मिलते हैं कद्रदाँ


किस्मत वालों को
मिलते हैं कद्रदाँ
शुक्र खुदा का मानिए
कद्रदानों की कद्र कीजिए
दिल से सलाम उन्हें कीजिए
निरंतर याद उन्हें कीजिए
दूर हो या पास
दुआ उनके लिए मांगिए
जो बढाते हैं होंसला
उन्हें शुक्रिया अदा कीजिए
जो जानते नहीं तुम्हें
कद्र फिर भी तुम्हारी करते
अहसान उनका मानिए 
उन्हें प्यार से नवाजिए
इज्ज़त उनकी
कीजिए
26-03-03

26-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
509—179-03-11