निरंतर कुछ सोचता रहे,कुछ करता रहे,कलम के जरिए बात अपने कहता रहे.... (सर्वाधिकार सुरक्षित) ,किसी की भावनाओं को ठेस पहुचाने का कोई प्रयोजन नहीं है,फिर भी किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचे तो क्षमा प्रार्थी हूँ )
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Wednesday, September 14, 2011
मन मेरा चंचल बहुत कैसे इसे समझाऊँ ?
मन मेरा चंचल बहुत
कैसे इसे समझाऊँ ?
इच्छाएँ बहुत संजोता
स्वप्नलोक में खोता
कैसे वश में करूँ ?
हर आशा पूरी नहीं होती
सत्य कैसे इसे बताऊँ ?
ना थकता ना रुकता
निरंतर चलता रहता
अविरल विचारों में बहता
समुद्र की लहरों सा
उफनता
कैसे विराम लगाऊं ?
मन मेरा चंचल बहुत
कैसे इसे समझाऊँ ?
13-09-2011
1500-72-09-11
Tuesday, August 9, 2011
दो लफ्ज़ तारीफ़ के क्या लिख दिए उन्होंने
क्या लिख दिए उन्होंने
मन चंचल हो गया
निरंतर उनसे मिलने
की जिद करने लगा
दिल ने भी
तस्वीर देख ली उनकी
दिल क्यों पीछे रहने लगा
दिल भी बेकाबू हो गया
इज़हार-ऐ-मोहब्बत
को मचलने लगा
कोई बता दे मुझे
कैसे दोनों को समझाऊँ ?
या फिर तरीका बता दे
पैगाम उन्हें भिजवा सकूँ
उनकी रज़ा भी जान लूं
09-08-2011
1326-48-08-11
Thursday, August 4, 2011
मेरा उनसे एक रिश्ता हो गया
एक रिश्ता हो गया
ख़्वाबों को मकसद
हसरतों को मुकाम
मिल गया
मंजिल का पता
चल गया
मन मेरा डोल गया
उन्हें देखा नहीं
उनसे मिला नहीं
फिर भी कुछ ऐसा
हो गया
निरंतर खामोश मन
चंचल हो गया
दिल बावरा हो गया
अब उनका हो गया
04-08-2011
1302-24-08-11
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