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Tuesday, September 27, 2011

आप बुलाएँगे तो हम ज़रूर आएँगे

आप बुलाएँगे
तो हम ज़रूर आएँगे
कोई तोहफा
साथ नहीं लाएँगे
मौके को रस्मों में नहीं
गंवाएँगे
लाएँगे आपके लिए
ढेर सारी हँसी
ढेर सारी खुशी
इत्मीनान से बैठेंगे
कुछ अपनी कहेंगे
कुछ आपकी सुनेंगे
जब आप कहेंगे 
चले जायेंगे
कुछ ऐसा कर के 
जाएँगे
आप बार बार 
बुलाएँगे
हम भी आपका 
न्योता
कभी नहीं ठुकराएंगे
निरंतर स्वीकारेंगे
आपके लिए
दुआएं करेंगे
आप बुलाएँगे  
तो हम
ज़रूर आएँगे
27-09-2011
1567-138-,09-11

Monday, April 4, 2011

वो निरंतर मुखालते में रहते थे

बड़े अरमानों से
खटखटाया
दरवाज़ा उनके घर का
दरवाज़ा खुला ,
वो सामने खड़े थे
बड़ी बेदर्दी से
ठोकर मार कर 
निकाला हमें
ये भी ना पूछा
क्यूं आये 
हम उनके घर पे ?
वो निरंतर मुखालते में
रहते थे
सब को एक नज़र से
देखते थे
हम न्योता हमारी शादी का
देने गए थे
उन्होंने समझा प्यार का
 इज़हार करने आये हैं
04-04-2011
598—31 -04-11