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Thursday, February 23, 2012

क्या और करूँ?

प्रभु कैसा
ये न्याय तुम्हारा 
जो इतना सताते हो
कब चैन दोगे मुझको?
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
प्रयत्न बहुत किया
सफलता
फिर भी ना मिली 
निरंतर
दिल में रखा तुम्हें
नित्य पूजा करी
हर काम वही करा
जो तुम्हें पसंद है
फिर भी
कृपा ना की तुमने
क्या त्रुटि हुयी मुझसे
इतना ही बता दो
क्या और करूँ?
तुम्हारी कृपा पाने को
इतना तो बता दो
23-02-2012
225-136-02-12

Monday, September 26, 2011

प्रभु मुझे फिर से हँसाओ

प्रभु कैसी
लीला तुमने रचायी
क्यों दुखों की दुनिया
दिखायी ?
मेरे सपनों की दुनिया में
क्यों आग लगायी ?
रातों की नींद उडायी
बेचैनी से दोस्ती करायी
ना मन को कुछ सूझे
ना दिल को कुछ भाए
निरंतर आँखों से आंसूं
बहते जाएँ
हंसना मुस्काराना
इतिहास हो गए
जीवन मरण इकसार
हो गए
जो बीत रहा मुझ पर
अब सहा नहीं जाए
कैसे किसी को बताऊँ?
किस से आस लगाऊँ ?
कहाँ जा कर शीश
 नवाऊँ ?
किस मंदिर में पूजा करूँ?
पथ मुझे दिखाओ
अब और ना तडपाओ
निरंतर रुदन से मुक्त करो
कोई नया लीला रचाओ 
26-09-2011
1559-130-09-11

Saturday, June 25, 2011

मुझ को शक्ति दो प्रभु

मुझ को शक्ति दो प्रभु
मन को निश्छल रख सकूँ
जगत में प्रेम बाँट सकूँ
ऐसा जीवन दो प्रभु
देश सेवा कर सकूँ
निशक्त को सहारा दे सकूँ
ऐसा होंसला दो प्रभु
मिलजुल कर रह सकूँ
सबको सुख बाँट सकूँ
ऐसी हिम्मत दो प्रभु
हृदय को निर्मल रख सकूँ
सत्य की राह पर चल सकूँ 
ऐसी इच्छा शक्ति दो प्रभु
बैर किसी से ना रख सकूँ
निरंतर
प्रेम से रह सकूँ
ऐसा जीवन दो प्रभु
प्रभु भक्ति में लीन रहूँ
जीना सार्थक कर सकूँ
ऐसी किस्मत दो प्रभु
25-06-2011
1098-125-06-11