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Tuesday, December 11, 2012

जब आस ख़त्म हो जाती


जब आस 
ख़त्म हो जाती
दिल टूट जाता है
मन दुखी रहता है
आसूं सूख जाते हैं
ज़िन्दगी दोजख
लगती है
जीना मौत से भी
दुश्वार लगता है
927-45-12-12-2012
शायरी,आस,दुश्वार

Monday, September 26, 2011

प्रभु मुझे फिर से हँसाओ

प्रभु कैसी
लीला तुमने रचायी
क्यों दुखों की दुनिया
दिखायी ?
मेरे सपनों की दुनिया में
क्यों आग लगायी ?
रातों की नींद उडायी
बेचैनी से दोस्ती करायी
ना मन को कुछ सूझे
ना दिल को कुछ भाए
निरंतर आँखों से आंसूं
बहते जाएँ
हंसना मुस्काराना
इतिहास हो गए
जीवन मरण इकसार
हो गए
जो बीत रहा मुझ पर
अब सहा नहीं जाए
कैसे किसी को बताऊँ?
किस से आस लगाऊँ ?
कहाँ जा कर शीश
 नवाऊँ ?
किस मंदिर में पूजा करूँ?
पथ मुझे दिखाओ
अब और ना तडपाओ
निरंतर रुदन से मुक्त करो
कोई नया लीला रचाओ 
26-09-2011
1559-130-09-11

सूने आकाश में इक बदली आयी

सूने आकाश में
इक बदली आयी
कुछ बूँदें बरसायी
मन में आशाएं जगायी
दिल की आस बढ़ायी
हौले से आगे बढ़ गयी
आँखें
निरंतर तरसती रही
दिल को तडपाती रही
चुपचाप सहने के लिए
छोड़ गयी
सूखी धरती सूखी
रह गयी
दुखी मन को संतुष्टी
नहीं मिल पायी
दिल की आस
पूरी ना हो पायी
25-09-2011
1556-127-09-11

Tuesday, September 13, 2011

आस अभी बाकी है

दिल दर्द से भरा
जहन
निरंतर फ़िक्र से अटा
कुछ हसरतें फिर भी
बाकी है
खिजा को बहारों की
उम्मीद अभी बाकी है
काँटों से
दोस्ती बहुत कर ली   
फूलों से
दोस्ती की तमन्ना
अभी बाकी है
अंजाम की फ़िक्र नहीं 
खोने को कुछ बचा नहीं
दिल की आग अभी
बुझी नहीं
ज़िन्दगी के जुए में
एक दाँव अभी बाकी है
कश्ती को साहिल की
आस अभी बाकी है
13-09-2011
1497-69-09-11

Saturday, June 4, 2011

आस अब सिर्फ उनकी रह गयी

मोहब्बत क्या हुयी
दिल की खलिश
बढ़ गयी
वक़्त की लम्बाई
बढ़ गयी
आँखों से नींद उड़ गयी
दिल-ओ-दिमाग में
सूरत सिर्फ उसकी
रह गयी
निरंतर खामोशी
हाहाकार में बदल गयी
आस अब सिर्फ उनकी 
रह गयी
04-06-2011
1000-27-06-11