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Sunday, October 28, 2012

मिला नहीं जब तक साहिल उन्हें



लबों पर नाम उनका ,
जहन में यादें उनकी
दिल धड़कता उनके लिए
पर उन्हें फ़िक्र नहीं
हमने समझा था
साहिल उन्हें
उन्होंने समझा साहिल तक
पहुचाने की किश्ती का
मांझी हमें
मिला नहीं जब तक
साहिल उन्हें
हँस कर मिलते रहे
हमारे दिल से खेलते रहे
806-48-28-10-2012
यादें,साहिल,मंजिल,बेवफाई ,शायरी,

Tuesday, November 15, 2011

हम जानते तुम्हारी तकलीफ क्या है


हम जानते तुम्हारी
तकलीफ क्या है
निरंतर मुस्काराता
चेहरा मुरझाया हुआ
क्यूं है ?

दर्द-ऐ दिल से परेशाँ
हो तुम
अपने साहिल से दूर
हो तुम

हम भी गुजर रहे इसी
मुकाम से
दूर हैं अपने साहिल से

फर्क इतना सा है
हमें पता है
हमारे साहिल का
तुम अनजान उस से हो

अब देख नहीं सकते
तुम्हें बदहाली में
बताना ही पडेगा
राज़-ऐ-दिल तुम्हें

तुम्ही मंजिल
तुम्ही साहिल हमारे

जब जान ही गए हो
रंजों गम दूर कर लो
हमें कबूल कर लो
15-11-2011
1792-63-11-11

Tuesday, September 13, 2011

आस अभी बाकी है

दिल दर्द से भरा
जहन
निरंतर फ़िक्र से अटा
कुछ हसरतें फिर भी
बाकी है
खिजा को बहारों की
उम्मीद अभी बाकी है
काँटों से
दोस्ती बहुत कर ली   
फूलों से
दोस्ती की तमन्ना
अभी बाकी है
अंजाम की फ़िक्र नहीं 
खोने को कुछ बचा नहीं
दिल की आग अभी
बुझी नहीं
ज़िन्दगी के जुए में
एक दाँव अभी बाकी है
कश्ती को साहिल की
आस अभी बाकी है
13-09-2011
1497-69-09-11

Monday, July 11, 2011

मोहब्बत की किश्ती को खेता रहा

मोहब्बत की 
किश्ती को खेता रहा
साहिल तक
पहुँचने की कोशिश
करता रहा
ना साहिल मिला
ना किश्ती रुकी
ना हिम्मत टूटी
ना ज़ज्बा कम हुआ
निरंतर मंझधार में
फँसा रहा
मोहब्बत के खातिर
कुर्बान हो गया
11-07-2011
1163-47-07-11

Sunday, March 27, 2011

जी चाहता ख़ूबसूरती को किश्ती,दिल को साहिल बना लूं



  जी चाहता
सूरज की रोशनी चुरा लूं
अंधेरी ज़िन्दगी को   
रोशन कर दूं
ज़रा सा उजाला भी
सुकून देगा
जीने का 
नया जज्बा देगा
जी चाहता कुछ सितारे
आसमान से चुरा लूं
झिलमिलाहट
ज़िन्दगी में भर दूं
काली रातों में रंग भर दूं
जी चाहता ठंडी हवाएं
पास अपने समेट लूं
जहन की गर्मी को
ठंडक से भर दूं
जी चाहता
ख़ूबसूरती को किश्ती
दिल को साहिल बना लूं
वो निरंतर करीब मेरे रहे
मेरे हर लम्हा उन्हें दे दूं 
साथ जियूं साथ चले
जाऊं  
27-03-03
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
520—190-03-11