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Tuesday, December 11, 2012

कली खिल जाए पौधे में तो फूल खिलना भी आवश्यक



कली खिल जाए पौधे में
तो फूल खिलना भी
आवश्यक
फूल खिल जाए पौधे में
तो महकना भी
आवश्यक
जन्म लिया इंसान ने
तो जीना भी आवश्यक 
जी भी ले इंसान
तो इंसान बन कर
रहना भी आवश्यक
934-53-12-12-2012
इंसान,जीवन ,फूल,

Thursday, April 12, 2012

अच्छे के साथ


छात्र के जन्म दिन पर
शिक्षक ने गुलाब के
फूल की टहनी भेंट की
छात्र बोला गुरूजी
इसमें कांटे लगे हैं
हाथ में चुभेंगे
शिक्षक ने उत्तर दिया
चिंता मत  करो
काँटों से बचा कर इसे
पकड़ो
ध्यान रखो संसार में 
अच्छे के साथ
बुरा भी होता है
बुरे से बच कर रहो
अच्छे का साथ कभी
मत छोडो
10-04-2012
429-08-04-12

Saturday, February 25, 2012

जिस पौधे में कलियाँ ना खिले वो किसे भाता ?

जिस पौधे में
कलियाँ ना खिले
वो किसे भाता ?
जो कली फूल बन कर
ना खिले
उसे कौन चाहता ?
जो फूल
रूप से नहीं लुभाए
वो किसे अच्छा लगता ?
अपनी महक से
मदमस्त ना करें
उसे कौन याद रखता?
जो मनुष्य
मधुर व्यवहार ना करे
वो किसे भाता ?
जो अपने कर्मों की
महक
जग में ना फैलाए
उसे कौन याद रखता?
25-02-2012
243-154-02-12

Sunday, February 12, 2012

अच्छा हुआ जो फूल के रूप में पैदा नहीं हुआ

बचपन से ही
फूल मुझे बहुत पसंद हैं
पर पहले सोचता था
कितना अच्छा भाग्य होता
फूलों का
हर आदमी उन्हें चाहता
उनकी सुगंध से
मदमस्त हो जाता
इश्वर को
या अन्य  किसी को भी
सम्मान रूप भेंट किया जाता 
मन में सवाल आता
इश्वर ने फूल के रूप में
क्यों जन्म नहीं दिया
क्यों मुझे इंसान बनाया
अब सोचता हूँ
इंसान के रूप में ही ठीक हूँ
अच्छा हुआ जो फूल के रूप में
पैदा नहीं हुआ
जो भी खूबसूरत फूल खिलता
भंवरों से बच भी जाए
किसी ना किसी हाथ द्वारा
नोंच लिया जाता
माला बनाने के लिए सुई से
बींध दिया जाता
समारोह पूरा होते ही
फैंक दिया जाता
पैरों तले  रौंद दिया जाता
मौत आने से पहले ही
कई बार मार दिया जाता
सुन्दर दिखना और महकना ही
काफी नहीं होता
कष्ट में जीवन जीना पड़े चाहे
पर परमात्मा से
बुलावा आने पर ही
सम्मान पूर्वक
संसार से जाना चाहता
किसी के हाथों बेरहमी से
कुचला और मारा नहीं
जाना चाहता 
12-02-2012
155-66-02-12

Wednesday, October 12, 2011

काँटों में भी सुन्दर फूल खिलते



गुलाब के पौधे में
फूल बहुत सुन्दर
खिलते
निरंतर महकते
सब को लुभाते
फिर भी लोग उसके
काँटों से दुखी रहते
निरंतर पौधे में खोट
निकालते
ये कभी ना सोचते
काँटों में भी सुन्दर
फूल खिलते
फूलों को काँटे कभी
हानी ना पहुंचाते
हर दिन अपने बीच
नये फूल खिलाते

12-10-2011
1635-43-10-11

Thursday, September 1, 2011

मुरझाये फूल को ठोकर ना मारो

ठोकर ना मारो
इस तरह नफरत
ना करो
कभी निरंतर
महकता था
भंवरों को लुभाता था
गुलशन की शान
बढाता था
वक़्त की मार से
झुलस गया है
वक़्त ने कब किसे
छोड़ा है
वक़्त तुम्हारा भी
बदलेगा
इक दिन तुम्हें भी
मुरझाना होगा
उस वक़्त का अहसास
कर लो
थोड़ी सी इज्ज़त
बक्श  दो
थोड़ा सा प्यार दे दो
मिट्टी में दफना दो
01-09-2011
1430-05-09-11