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Sunday, July 17, 2011

जब मुंसिफ ही कातिल हो गए,फैसला क्या ख़ाक करेंगे


आवाम का माल
जब जेब में रखेंगे
चोरों को
क्या ख़ाक पकड़ेंगे  
वोट के खातिर
मजहब की सियासत
करेंगे
आवाम का ख्याल
क्या ख़ाक रखेंगे
निरंतर गद्दारों को
जब माफ़ करेंगे
मुल्क का ख्याल
क्या ख़ाक रखेंगे
कातिल हो गए
फैसला
क्या ख़ाक करेंगे
गुनाहगार बाहर होंगे
बेगुनाह सज़ा पाते
रहेंगे
17-07-2011
1196-76-07-11
(मुंसिफ=फैसला करने वाला,सियासत =राजनीति ,आवाम =जनता)

Saturday, July 16, 2011

निरंतर सोचता हूँ कब हथियार उठाऊँ मैं ?

मुल्क के नेता
लाशों पर सियासत
करते रहे
कुर्सी के खातिर
मजहब के नाम पर
हाथ पर हाथ धर कर
बैठे रहे
हम रोज़ अपनों को
खोते रहे
मासूम जान से हाथ
धोते रहे
वो जाम पर जाम
उड़ाते रहे
हम खून के घूँट
पीते रहे 

अब मुमकिन नहीं की
खामोशी से बैठ जाऊँ मैं
लोग मरते रहे
चुपचाप देखता जाऊँ मैं
सीने में सुलग रही
आग को
कब तक दबाऊँ मैं ?
निरंतर सोचता हूँ
कब हथियार 
उठाऊँ मैं ?
क्या इनके जैसा 
बन जाऊँ मैं ?
काम हैवान का 
कर दूं मैं ?
खुदा का ख्याल 
आते ही
रुक जाता हूँ मैं

16-07-2011
1192-72-07-11