Showing posts with label मस्ती. Show all posts
Showing posts with label मस्ती. Show all posts

Tuesday, March 20, 2012

कभी बहते पानी सा होता था


पानी सा होता था
मस्ती में
डूबा रहता था
जब से तुम्हें देखा
तालाब के पानी सा
ठहर गया हूँ
तुम्हारे ख्यालों में खोया
रहता हूँ
हर लम्हा इंतज़ार
करता हूँ
कब आकर
तोडोगी
दीवारें तालाब की
बहने दो
मुझे साथ तुम्हारे
मोहब्बत की धारा में
मिल जाने दो मुझे
तुम्हारी ज़िन्दगी के
समंदर में
20-03-2012
417-151-03-12

Saturday, March 10, 2012

हास्य कविता-मित्र बोला हँसमुखजी से खूब मनाई तुमने होली

मित्र
बोला हँसमुखजी से
खूब मनाई तुमने होली
कृष्ण बन कर
की भरपूर मस्ती
खूब किया
नैन मटक्का राधा से
चढ़ाई भांग
लगाया रंग राधा के
राधा भी ना शरमाई 
ना घबरायी तुमसे
लगी समझने तुमको
कन्हैया
हँसमुखजी ने अचम्भे से
आँखें मटकायी
कहने लगे हाय हाय
मुझसे भारी भूल हो गयी
अब दिल ना दुखाओ
ना ही सुनाओ
किस्से मस्त होली के
ना दिखी राधा मुझको
ना दिखी पिचकारी 
ना जाने 
कब आ कर गले मिली
कब करी आँख मिचोली
खेली मुझ से होली
भांग के नशे में
सुध बुध मैंने खो दी थी
आज कसम खाता हूँ
अगली होली पर नहीं
पियूंगा
बेचैनी से करता रहूँगा
राधा का इंतज़ार 
खूब खेलूंगा होली
खूब लगाऊंगा रंग
रचाऊंगा रास जी
भर के
मिलाऊंगा नैनों से नैन
राधा से
10-03-2012
337-71-03-12