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Tuesday, August 21, 2012

कैसे ख्यालों को ज़हन में आने से रोकूँ



तुम ही बताओ
कैसे  ख्यालों को
ज़हन में आने से रोकूँ
कैसे ख़्वाबों को खुद से
दूर रखूँ
इतना तंगदिल भी नहीं
मेहमान को आने ही ना दूं
ये बात जुदा है
मेहमान पसंद का मेरा
दिल से चाहता उसे
हकीकत में
बुलाने से भी नहीं आता
ख्यालों ख़्वाबों में
बिना बुलाये भी आ जाता
शायद मोहब्बत को
ज़माने से छुपाना चाहता
21-08-2012
679-39-08-12

Monday, April 30, 2012

ख्यालों में


तुमसे बात करता हूँ
जब भी कोई आहट होती
ख्यालों की लड़ी टूटती
मुझे लगता
तुम हकीकत में आ गयी हो
दरवाज़े पर दस्तक
दे रही हो
मैं दौड़ कर दरवाज़ा
खोलता हूँ
तो सूनी सड़क  के सिवाय
कुछ नहीं दिखता
लौट कर फिर तुम से
गुफ्तगू करने की उम्मीद में
ख्यालों की दुनिया में
लौटता हूँ
तुम्हारे इंतज़ार में
ख्यालों से इस हद तक
लगाव हो चुका है
अब अगर हकीकत में
आ भी जाओ तो
तुमसे कह दूंगा
मिलना है तो ख्यालों में
ही मिलो मुझसे
27-04-2012
480-61-04-12

Tuesday, March 20, 2012

कभी बहते पानी सा होता था


पानी सा होता था
मस्ती में
डूबा रहता था
जब से तुम्हें देखा
तालाब के पानी सा
ठहर गया हूँ
तुम्हारे ख्यालों में खोया
रहता हूँ
हर लम्हा इंतज़ार
करता हूँ
कब आकर
तोडोगी
दीवारें तालाब की
बहने दो
मुझे साथ तुम्हारे
मोहब्बत की धारा में
मिल जाने दो मुझे
तुम्हारी ज़िन्दगी के
समंदर में
20-03-2012
417-151-03-12