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Monday, July 18, 2011

एक ही इच्छा मन में बसी

शैशव का प्रभात
सुन्दर था
मन निश्छल,निश्चिंत
दिल कांच सा स्वच्छ
चंचलता से भरा
नटखट
यौवन काल
मादकता का रूप
आँखों को
आराम ना था
तन,मन में
हिम्मत और जोश
आशा और प्रकाश से
भरा था
अब जीवन का
संध्या काल है
चेहरे की
लालिमा कम
हो गयी
 आशाएँ और 
आकांषाएँ
घट गयी
व्यवहार में नरमी
आ गयी
दिन शांती से
कट जाए
निरंतर
सब से निभ जाए
ना कोई दुर्भावना
ना कोई, 
भय मन में 
एक ही इच्छा
मन में बसी
जीवन-सूर्य
बिना बताए
चुपके से अस्त
हो जाए
18-07-2011
1201-81-07-11

Wednesday, April 6, 2011

कल फिर नया सूरज उगेगा,नया बचपन आयेगा


सूर्योदय
नम्र धूप बिखेरता
रात का काला अन्धेरा
भगाता
उजाला पृथ्वी पर न्योछावर
करता
नयी आशा और जीवन का
संचार करता
बचपन,सूर्योदय सा होता
पुराना जाता,नया आता
नम्र चेहरा,सब को लुभाता
जीवन आशाओं से भरा
भविष्य का दर्पण सा होता
दोपहर का तेज़ सूर्य
अपने पूरे शवाब में होता
जोश में दहकता,
देखने की कोई हिम्मत
ना करता 
अपने तेज़ से पृथ्वी को
चका चौंध करता
यौवन दोपहर के सूर्य सा होता
भरपूर चमकता 
बहते पानी सा बहता रहता
शक्ति और जोश से भरा होता
असंभव को संभव करता
शाम को सूर्य थकता,
तेज़ उस का कम होता
दह्कना मंद होता 
जाते जाते लालिमा बिखेरता
आकाश को
अनेक रंगों से भरता
अनंत में छुप जाता
बुढापा सूर्यास्त सा होता
पर जीवन कब अस्त होगा
पता ना होता
तेज़ चेहरे का कम होता
शरीर थक जाता
अच्छे बुरे
कर्मों का विश्लेषण होता
सद्कर्म लालिमा बिखेरते
औरों को रास्ता दिखाते
दुष्कर्म ग्लानि से भरते
लोग निरंतर हिकारत से
देखते
कल फिर नया सूरज उगेगा
नया बचपन आयेगा 
06-04-2011
611-44 -04-11