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Sunday, July 29, 2012

नयी नवेली दुल्हन थी


प्रियतम तडके घर से
काम पर निकल गए
बिना प्रियतम दिन
कैसे कटेगा  ?
रात सुहानी थी
दिन कैसा होगा ?
कब लौटेंगे प्रियतम ?
सोच में डूबी थी
अनमने भाव से काम में
लगी थी
प्रियतम के बिना
मन उदास था
समय काटे नहीं कट
रहा था
सब बोझ लग रहा था,
बिना प्रियतम बिन पानी के
मछली सी तड़प रही थी
उसका संसार अब 
प्रियतम में
सिमट गया था
वही लक्ष्य ,वही सपना
वही अब जीवन उसका
नयी नवेली दुल्हन थी
विवाह के बाद की दूसरी
सुबह थी
29-07-2012
627-24-07-12

Tuesday, August 9, 2011

वो दोनों मिले ,मिल कर हम हुए

वो दोनों मिले

मिल कर हम हुए

प्रेम के संसार का

सृजन हुआ

परिणीति में

प्रेम फल उत्पन्न

हुआ

जीवन दोनों का

सार्थक हुआ

दो से तीन हुए

जीवन को

अर्थ मिल गया

निरंतर

माँ को ममत्व का

पिता को पितृत्व का
कर्तव्य निभाने का

एक जीवन को

संवारने का

सुखद अवसर

प्राप्त हुआ

09-08-2011

1325-47-08-11

Monday, June 20, 2011

हंसमुखजी ने विवाह की पचासवीं वर्षगाँठ मनायी

हंसमुखजी ने
विवाह की पचासवीं
वर्षगाँठ मनायी
लोगों ने उनकी हिम्मत पर 
आश्चर्य से दांतों तले 
ऊंगली दबायी
धीरे से मन की जिज्ञासा
हंस मुखजी को बतायी
कैसे सफलता पायी ?
कैसे इतने साल निभायी ?
हमें भी बताओ
मन की जिज्ञासा मिटाओ
नयी पीढी को भी
रास्ता दिखाओ
हंसमुखजी हँसे फिर बोले
बहुत आसानी से निभायी
वो हंसी, मैं हंसा
वो रोयी,मैं रोया
उसने धोया,मैं धुला
उसने लगायी,मैंने खायी
उसने कहा, मैंने सुना
वो रूठी, मैंने मनाया
वो आगे आगे,मैं पीछे पीछे
ना क्रोध किया,
ना विरोध किया
जो माँगा वो दिया
हर स्थिती को
सहर्ष स्वीकार किया
निरंतर
उसकी हाँ में हाँ मिलायी
तब जा कर पचासवी
वर्षगाँठ मनायी
अब आदत हो गयी
इस लिए सौंवी  भी
मनायी जायेगी
20-06-2011
1077-104-06-11
आदरणीय श्री मोहन लालजी जैन को
(क्षमा सहित) ,
शुभकामनाओं के साथ सप्रेम भेंट