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Tuesday, May 15, 2012

खून जब बन जाता है पानी

बन जाता है पानी
मर्यादाएं
हो जाती हैं ध्वस्त
संतान
निकम्मी हो जाती
प्रताड़ित
करती माँ बाप को
रोती है धरती
रोता है आकाश
रोते हैं माँ बाप
कोसते हैं किस्मत को
क्यों जन्म दिया
ऐसी संतान को
निसंतान होने का दुःख
इतना भीषण तो
नहीं होता
खुद का खून जहर
बन कर
पल पल जान तो
नहीं लेता
14-05-2012
521-41-05-12

Tuesday, March 20, 2012

बिना माँ के


साधन संपन्न,धनाढ्य ने
कमरे की खिड़की से
घनघोर बरसात का
आनंद लेते हुए देखा
माँ स्वयं भीग रही थी
पर पुत्र के सर पर
छोटी सी छतरी ताने
उसे बरसात से बचाते हुए
चली आ रही थी
उसकी आँखें नम हो गयी
सोचने लगा
इश्वर का कैसा न्याय है
उसे धन संपदा तो दिया 
पर जन्म के साथ ही
क्यों उसकी माँ को उससे
छीन लिया
आज उसे समझ आ
गया था
माँ से अधिक प्यार
देने वाला
स्वयं से अधिक दूसरे को
चाहने वाला 
माँ के सिवाय संसार में
दूसरा नहीं होता
धन कितना भी हो
बिना माँ के व्यर्थ
लगता
20-03-2012
413-147-03-12


Tuesday, November 29, 2011

क्या मुझ से पूछ कर,तुमने मुझे जन्म दिया ?



क्या मुझ से पूछ कर
तुमने मुझे जन्म दिया ?
दुनिया में लाने से पहले
तुमने किस से पूछा
बेटे ने ,पिता से
क्रोध में प्रश्न किया
व्यथित पिता से
रहा ना गया
आँखों में आंसू लिए
सहमते हुए उत्तर दिया
जब राम,कृष्ण,बुद्ध,
महावीर के पिता ने
किसी से नहीं पूछा
मैं किस से पूछता ?
मैंने केवल संसार के
नियम का पालन किया
परमात्मा की
इच्छा का सम्मान किया
अगर मुझे पता होता
तुम्हारे जैसी
संतान का पिता
कहलाना पडेगा
संतान के हाथों निरंतर
प्रताड़ित होना पडेगा
परमात्मा के नियम को
तोड़ देता
विवाह के बंधन में
कभी नहीं बंधता
इस तरह
अपने खून के हाथों
हर दिन तिल तिल कर
ना मारा जाता
तुम अपनी संतान से
पूछ कर उसे जन्म देना
वो पूछे तो
खुशी से सुन लेना
उत्तर में
उसे शाबाशी देना
29-11-2011
1827-92-11-11

Tuesday, June 21, 2011

जन्म लेने वाला ,जन्म देने वाले से बड़ा नहीं होता

धरती में
बीजारोपण हुआ
बीज अंकुरित हुआ
पल्लवित हुआ
पौधा पनपने लगा 
पत्तियों से भर गया 
एक कली खिली
फूल का जन्म हुआ
सौन्दर्य और महक से
सब को लुभाने लगा
आकर्षण का केंद्र
अब पौधा नहीं फूल था
घमंड में फूल इतराने लगा
पौधे और पत्तियों को
भूल गया
निरंतर अहम् में 
रहने लगा
अहंकार में पत्तियों से
बात करना बंद कर दिया 
पौधा व्यथित होता रहा
नादानी 
समझ सहता रहा
समय के अंतराल में
पौधा मुरझा गया
फूल का भी अंत हुआ
समझ नहीं सका
अचानक क्या हुआ ?
भूल गया था
उसका सौन्दर्य 
पौधे की देन था
पौधा ही पालनहार था
पौधा ही उसके अस्तित्व
का कारण था
वो मात्र एक अंग था
चाहे संतान कितनी भी
ऊंचाइयां ले ले
जन्म लेने वाला
जन्म देने वाले से
बड़ा नहीं होता
21-06-2011
1080-107-06-11

Monday, March 21, 2011

अब पछताए होत क्या,जब चिड़िया चुग गयी खेत का अर्थ समझ आयेगा



ज्यादा पानी से
फसल का भी नाश
होता
पानी ज़्यादा हो
तो बाँध भी टूट जाता 
ज्यादा प्यार में लाडला 
बिगड़ जाता
हर चीज़ को आसान
समझने लगता 
प्यार की कद्र ना
करता
अच्छे बुरे में भेद ना
पहचानता
प्यार का जवाब नफरत
से देता 
लाडलों को प्यार ज़रूरी
उतना करो
गलती करने पर डांट
भी लगाओ
बुढापे का सहारा समझ
सर पर ना चढाओ
असफलता का दोष तुम पर
लगेगा
क्यों वक़्त पर नहीं
समझाया
निरंतर सुनने को
मिलेगा
पानी हर दिन नहीं
बरसता
पानी को सम्हाल
कर रखो
व्यर्थ उसे ना करो,
बह जाएगा तो लौट कर
ना आयेगा
अब पछताए होत क्या
जब चिड़िया चुग गयी
खेत का
अर्थ समझ आयेगा
    21-03-2011
डा.राजेंद्र तेला"निरंतर",अजमेर
464—134-03-11