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Thursday, April 12, 2012

यादगार बन गया दिन सात अप्रैल का



यादगार बन गया
दिन सात अप्रैल का
कोई आया
बोस्टन,न्यू जर्सी से
तो कोई मुंबई,बंगलौर से
क्या पुत्र पुत्री
क्या साले,साली
क्या पोते नाती
सब के सब इकट्ठा हुए
अजमेर शरीफ में
माँ पिता के विवाह की
चौहतरवीं वर्षगाँठ पर
मिला परिवार पूरा
आये मित्र,रिश्तेदार भी सारे
सुनाये सबने किस्से
उनके साथ बिताये दिनों के
हो गए भाव विव्हल
याद कर
खट्टी मीठी बातों को
माँ ने नृत्य किया
पिता ने बताये सफल
वैवाहिक जीवन के राज़
खूब हँसे खूब नाचे गाये
इस सुनहरे अवसर पर
बिरले ही होते हैं
जिन्हें होते नसीब
जीवन में ऐसे अवसर
11-04-2012
432-12-04-12

Tuesday, November 29, 2011

क्या मुझ से पूछ कर,तुमने मुझे जन्म दिया ?



क्या मुझ से पूछ कर
तुमने मुझे जन्म दिया ?
दुनिया में लाने से पहले
तुमने किस से पूछा
बेटे ने ,पिता से
क्रोध में प्रश्न किया
व्यथित पिता से
रहा ना गया
आँखों में आंसू लिए
सहमते हुए उत्तर दिया
जब राम,कृष्ण,बुद्ध,
महावीर के पिता ने
किसी से नहीं पूछा
मैं किस से पूछता ?
मैंने केवल संसार के
नियम का पालन किया
परमात्मा की
इच्छा का सम्मान किया
अगर मुझे पता होता
तुम्हारे जैसी
संतान का पिता
कहलाना पडेगा
संतान के हाथों निरंतर
प्रताड़ित होना पडेगा
परमात्मा के नियम को
तोड़ देता
विवाह के बंधन में
कभी नहीं बंधता
इस तरह
अपने खून के हाथों
हर दिन तिल तिल कर
ना मारा जाता
तुम अपनी संतान से
पूछ कर उसे जन्म देना
वो पूछे तो
खुशी से सुन लेना
उत्तर में
उसे शाबाशी देना
29-11-2011
1827-92-11-11

Wednesday, September 28, 2011

बेटी



बेटी

ह्रदय का अंग होती

उसकी पीड़ा सही

ना जाती

व्यथा उसकी

निरंतर रुलाती

ह्रदय को तडपाती

एक पल भी चैन नहीं

लेने देती

मन सदा

उसकी कुशल क्षेम चाहता

उसके प्यार में  डूबा

रहता

बेटी का जन्म

पिता का सबसे

महत्वपूर्ण सृजन होता

प्रेम निश्छल,निस्वार्थ होता

उसकी खुशी ह्रदय की

सबसे बड़ी खुशी होती

बेटी ,पिता के जीवन में

खिलती धूप सी होती

उसकी कमी

अन्धकार से कम

ना होती

बेटी  पिता को

परमात्मा की भेंट होती

उसके नाम से ही आँखें

नम होती 

28-09-2011
 1577-148-,09-11


मुझे मेरे लिए कुछ नहीं चाहिए

मुझे मेरे लिए
कुछ नहीं चाहिए
जो भी चाहिए
तुम्हारे लिए चाहिए
तुम्हारे होठों पर हंसी
चाहिए
तुम्हारे दिल में खुशी
चाहिए
हिम्मत तुम्हारी लौटनी
चाहिए
निरंतर जीवन में गति
चाहिए
कभी थके नहीं ऐसी
शक्ति चाहिए
चैन की नींद चाहिए
परमात्मा से प्रार्थना मेरी
तुम्हें कभी रोता ना देखूँ
मुझे ऐसी किस्मत
चाहिए
28-09-2011
1576-147-,09-11
(एक पिता की प्रार्थना,अपनी बिटिया के लिए )

Sunday, July 24, 2011

उसकी व्यथा में व्यथित खुशी में खुश होता हूँ

उसकी व्यथा में
व्यथित
खुशी में खुश
होता हूँ
वो मेरी,
मैं उसका हूँ
मेरे अरमानों की
मंजिल थी
बड़ी ख्वाइशों के बाद
जन्मी थी
आँख खुलते ही
मुझे देखा
मुस्काराहट का
तोहफा दिया
उसका बचपन
अपनत्व का सुखद
अहसास था
उसके साथ खेलना
मेरी पहली
पसंद था
बिना उसके हर पल
भारी लगता
उसका यौवन
मुझे मेरी जिम्मेदारी
याद दिलाता
उसकी हर बात
मुझे याद है
बात करे बिना मन
उदास रहता
कभी प्यार से डांट
लगाता
कभी हिम्मत,हौंसला
बढाता
उसका ख्याल
सदा दिमाग में
कुलबुलाता
अब मुझ से दूर
विदेश में रहती
निरंतर उसकी चिंता
सताती
कैसे समझाऊँ उसे?
बिना उसके ज़िन्दगी
अधूरी मेरी
उसकी खुशी ,
खुशी मेरी
मेरा दिल उसके लिए
धड़कता
वो मेरी खुशी के लिए
आंसू बहाती
मैं पिता,
वो बिटिया मेरी
24-07-2011
1224-104-07-11