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Saturday, December 15, 2012

ज़िन्दगी जीने की जगह काटनी पड़ रही है



रिश्तों में गर्माहट
ख़त्म हो चुकी है
अब मिलने पर
खोखली हँसी बची है
अपनत्व की बली
चढ़ाई जा चुकी है
अहम् और स्वार्थ की
बन आ पडी है
दिलों में बर्फ जम चुकी है
रंग बिरंगी ज़िन्दगी
अब फीकी पड़ गयी है
ज़िन्दगी जीने की जगह
काटनी पड़ रही है
938-57-15-12-2012
ज़िन्दगी,जीवन,रिश्ते ,अहम्,स्वार्थ,अपनत्व

Thursday, September 22, 2011

एक आवाज़ ने कानों को स्पर्श किया

एक आवाज़ ने
कानों को स्पर्श किया
मन में 
सुखद आभास हुआ
ह्रदय में अपनत्व का
संचार हुआ
निरंतर शून्यता में
स्पंदन हुआ
लगा कोई अपना फिर
लौट आया
एक पवित्र रिश्ते का
शुभागमन हुआ
बिछडों का मिलन
हुआ
22-09-2011
1539-110-09-11

Sunday, September 11, 2011

उनसे अपनत्व का आभास हुआ

नीरस जीवन को
सुखद अवसर प्राप्त हुआ
उनसे अपनत्व का
आभास हुआ
स्नेह से दो शब्द कहे
ह्रदय से आशीर्वाद दिया
मन से वो प्रसन्न हुए
कोटि कोटि धन्यवाद दिया
मुझे नया विश्वास मिला
मन के परिवार में
एक साथी जुड़ गया
जीवन में नयी आशा का
संचार हुआ
मन में प्रश्न खडा हुआ
मुझे झकझोर दिया
क्यों ना बड़े छोटों को
आशीर्वाद प्रदान करें
छोटे बड़ों का सम्मान करें
रिश्तों को प्रघाड करें
उत्कृष्ट व्यवहार और
अपनों सा  प्यार करें
वैमनस्य को दूर करें
सब मिल कर हँसते रहें
परमात्मा के सपने को
साकार करें
11-09-2011
1483-55-09-11

Sunday, July 24, 2011

उसकी व्यथा में व्यथित खुशी में खुश होता हूँ

उसकी व्यथा में
व्यथित
खुशी में खुश
होता हूँ
वो मेरी,
मैं उसका हूँ
मेरे अरमानों की
मंजिल थी
बड़ी ख्वाइशों के बाद
जन्मी थी
आँख खुलते ही
मुझे देखा
मुस्काराहट का
तोहफा दिया
उसका बचपन
अपनत्व का सुखद
अहसास था
उसके साथ खेलना
मेरी पहली
पसंद था
बिना उसके हर पल
भारी लगता
उसका यौवन
मुझे मेरी जिम्मेदारी
याद दिलाता
उसकी हर बात
मुझे याद है
बात करे बिना मन
उदास रहता
कभी प्यार से डांट
लगाता
कभी हिम्मत,हौंसला
बढाता
उसका ख्याल
सदा दिमाग में
कुलबुलाता
अब मुझ से दूर
विदेश में रहती
निरंतर उसकी चिंता
सताती
कैसे समझाऊँ उसे?
बिना उसके ज़िन्दगी
अधूरी मेरी
उसकी खुशी ,
खुशी मेरी
मेरा दिल उसके लिए
धड़कता
वो मेरी खुशी के लिए
आंसू बहाती
मैं पिता,
वो बिटिया मेरी
24-07-2011
1224-104-07-11