बरसों पहले
माँ से बिछड़े हुए
बालक का जब
अपनी माँ से
मिलना हुआ
तो उसकी सदा
दर्द में डूबी आँखों में
एक विजेती सी
चमक थी
मुरझाया हुआ चेहरा
दर्प में
विश्व विजेता सा
मुस्कारा रहा था
बड़े रौब से माँ की
ऊंगली पकड़ कर
कुछ इस तरह चल
रहा था
मानों दुनिया को
कह रहा हो
दुनिया वालों
अब मेरे पास भी माँ है
उसका आशीर्वाद है
अब मुझे किसी बात की
चिंता नहीं है
21-02-2012
208-119-02-12
अच्छा- बुरा
मैं किसी के लिए
बुरा
कोई मेरे लिए
अच्छा
फिर शिकायत
किस बात की
*
आडम्बर
खुद के आडम्बर का
पता नहीं चलता
दूसरों का बुरा लगता
*
जब मन रोता
जब मन रोता
आँसूं भी नहीं निकलते
अन्दर ही अन्दर
मनुष्य को खोखला
कर देते
कितना धन आवश्यक
खुदा
बहुत बड़ा अहसान
करता
अगर पैदा होते ही
बता देता
कितना धन आवश्यक
होगा
*
कल की चिंता
कल की चिंता में
घुलते हैं
आज बर्बाद करते हैं
*
हमदर्दी
लोग
हमदर्दी में भी
कंजूसी करते
हमदर्दी की उम्मीद
करते
*
राजनीति के राज़
राजनीति
के राज़
आम आदमी से
छुपे रहते
जिनके नाम पर
नेता
राजनीति करते
*
करूणा
करूणा का
करुण सत्य
कई बार दिखाने के
लिए की जाती
*
जिन्हें जानते नहीं
जिन्हें जानते नहीं
उन्हें जानने की इच्छा
रखते हैं
जानने के बाद
याद रखें या भूल जाएँ
सोचते रहते हैं
*
खुद जीते तो
खुद जीते तो
काबलियत
दूसरा जीते तो
किस्मत
*
गम-खुशी
उनका गम मेरी खुशी
मेरा गम उनकी खुशी
*
सुना था
परमात्मा
सर्वत्र होता
ढूंढा मंदिर
मस्जिद में जाता
*
आशीर्वाद
मुँह मुंबई की तरफ
जाना दिल्ली चाहते
काम दानवों का करते
आशीर्वाद भगवान्
का चाहते
*
गाली
का जवाब
गाली से दिया
उसमें
तुम में क्या फर्क
रहा
19-12-2011
1870-38-12
नीरस जीवन को
सुखद अवसर प्राप्त हुआ
उनसे अपनत्व का
आभास हुआ
स्नेह से दो शब्द कहे
ह्रदय से आशीर्वाद दिया
मन से वो प्रसन्न हुए
कोटि कोटि धन्यवाद दिया
मुझे नया विश्वास मिला
मन के परिवार में
एक साथी जुड़ गया
जीवन में नयी आशा का
संचार हुआ
मन में प्रश्न खडा हुआ
मुझे झकझोर दिया
क्यों ना बड़े छोटों को
आशीर्वाद प्रदान करें
छोटे बड़ों का सम्मान करें
रिश्तों को प्रघाड करें
उत्कृष्ट व्यवहार और
अपनों सा प्यार करें
वैमनस्य को दूर करें
सब मिल कर हँसते रहें
परमात्मा के सपने को
साकार करें
11-09-2011
1483-55-09-11