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Tuesday, October 9, 2012

समझ नहीं पाया जब देखा मैंने



समझ नहीं पाया
जब देखा मैंने
हर शख्श
चेहरे पर चेहरा लगाए
क्यूं घूम रहा है
मोहब्बत की जगह
ज़ख्म क्यूं दे रहा है
जब खुदा से इबादत करी
बड़ी मिन्नतों के बाद
उसने राज़ बताया
ज़न्नत में बहुत बड़ा
घोटाला हो गया है
जिन्हें तुम
ज़मीन पर ढूंढ रहे हो
वो घबराकर
ज़न्नत में बस गए हैं
जिन्हें होना चाहिए था
दोजख में
वो ज़मीन पर पहुँच
गए हैं
768-13-09-10-2012

घोटाला, ज़न्नत, दोजख

Thursday, March 8, 2012

ज़िन्दगी क्या है ,कोई ना जाना अब तक

ज़िन्दगी क्या है
कोई ना जाना अब तक
सबने अपने अपने
अंदाज़ से देखा उसे
अपनी अपनी
निगाहों से पहचाना उसे 
किसी ने
नाम दिया ज़न्नत का
किसी ने
दोजख बता दिया
कोई बोला
ज़िन्दगी कशमकश है
तो किसी ने कहा मोहब्बत है
कुछ ने कहा
ज़िन्दगी एक ऐसा मंज़र
जहां हँसना रोना साथ है
एक राय
कोई कर ना कर सका
अब तक
बस इतना ज़रूर पता है 
दिल जब तक धड़कता
इंसान ज़िंदा कहलाता
जिस दिन रुक गया
समझो सफ़र पूरा हुआ
ज़िन्दगी क्या है
कोई ना जाना
अब तक
08-03-2012
329-63-03-12

Wednesday, March 30, 2011

उन्हें याद हो ना हो,वो हमें याद आयेंगे

उन्हें 
याद हो ना हो
हमें याद आयेंगे
दरवाज़ा दिल का
निरंतर खुला रखेंगे
मंदिर मस्जिद में
दुआ करेंगे
मगर हसरतें ना
मिटाएँगे
सूरत उनकी बसी
मन में
अब ना भूल पायेंगे
कयामत तक इंतज़ार
करेंगे
ज़मीन पर ना मिलें
तो कोई बात नहीं
ज़न्नत में उनसे
मिलेंगे
दिल के अरमान पूरे
करेंगे  
 30-03-03
558—228-03-11